ट्वीटर के आसरे बिहार के युवा

नई दिल्ली. शिक्षकों की बहाली नहीं होने से टीईटी और एसटीईटी में सफलता पा चुके अभ्यार्थी निराशा की चपेट में है. शिक्षक बहाली को लेकर बिहार सरकार कितनी असंवेदनशील है ये इसी का उदाहरण है. बिहार में लंबे समय से शिक्षकों की बहाली नहीं की गई है. वहीं बिहार में विभागों की जो बदहाली है वो किसी से छिपी नहीं है.

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इसी का उदाहरण है कि एसटीईटी पास कर चुके शिक्षक अभ्यार्थी भी बहाली के लिए इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने ट्वीटर के जरिए अभियान चलाकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है. दुर्भाग्य की बात है कि आमतौर पर अगर अभ्यार्थी अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें लाठीचार्ज, आंदोलन और कोर्ट कचहरी तक का दरवाजा खटखटाना पड़ता है.

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वहीं अब बिहार में एसटीईटी के अभ्यार्थी बुधवार दो जून को ट्वीटर पर कैंपेन चलाएंगे. इसके जरिए 2019 में एसटीईटी पास कर चुके 37000 अभ्यार्थियों की बहाली की मांग की जाएगी. ये सभी अभ्यार्थी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के पद के लिए परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके है. परीक्षा पास करने के बाद भी बहाली नहीं होने की सूरत में बुधवार दो जून को #बदहाल_माध्यमिक_शिक्षा_बिहार #BSTET19_RESULT_AND_JOINING के साथ ट्वीटर पर अभियान चलाया जाएगा.

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इस संबंध में युवा हल्ला बोल के नेशनल कॉर्डिनेटर गोविंद मिश्रा ने बताया कि बिहार सरकार की आदत हो गई है कि परीक्षा लेती है और रिजल्ट देना भूल जाती है. बिहार में शिक्षा की बदहाली ऐसी है कि माध्यमिक स्कूलों में सभी मुख्य विषयों के लिए शिक्षक पद खाली हैं. यहां शिक्षकों का बड़ी संख्या में अभाव है.

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इसके बाद भी सरकार ने बीते पांच-छह सालों से स्ठायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की है. हाईस्कूल का हाल भी ऐसा ही है. वहीं नियुक्तियों को लेकर अभ्यार्थियों का कहना है कि सरकार जानती है कि कोरोना काल मे सड़क पर आंदोलन करना संभव नहीं है इसी का फायदा शायद उठा रही है. मगर हम चुप नहीं बैठेंगे. सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ अब सोशल मीडिया को हथियार बनाएंगे. इसी कड़ी में ट्वीटर पर अभियान शुरु होगा जिसके जरिए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाएंगे.

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बता दें कि बिहार राज्य में देश मे सबसे अधिक शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े है. सरकार शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. इस दिशा में सरकार लगातार उदासीन व्यवहार अपनाए हुए है. यही कारण है कि शिक्षक अभ्यार्थियों को अब सोशल मीडिया पर आकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ रही है.

ट्वीटर पर नियुक्ति के लिए आवाज उठाएंगे युवा

इस संबंध में अभ्यर्थियों ने बिहार के आम नागरिकों, बेरोज़गार युवाओं व संगठनों से अपील किया है कि बिहार की बदहाल माध्यमिक शिक्षा को सुधारने की इस मुहिम में अपना योगदान दें. गौरतलब है कि शिक्षकों की नियुक्ति में कोई बाधा नहीं है. इस परीक्षा में रिक्त सीटों से कम अभ्यार्थी उत्तीर्ण हुए है. ऐसे में सफल अभ्यार्थियों की नियुक्ति आसानी से की जा सकती है मगर सरकार ऐसा नहीं कर रही.

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