जानें क्यों हनुमान जी के भक्तों को परेशान नहीं करते शनिदेव

नई दिल्ली. हनुमान जयंती का महापर्व इस बार 27 अप्रैल मंगलवार को मनाया जाएगा. इस बार हनुमान जयंती पर कई विशेष संयोग भी बन रहे हैं. हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव की कृपा भी मिलती है. हनुमान जयंती पर उन लोगों को पूजा पाठ जरूर करनी चाहिए जिन पर शनि की साढ़ेसाती चल रही हो या शनि की ढैय्या चल रही है. हनुमान जी की पूजा करने से उन्हें विशेष लाभ मिलता है.

इस संबंध में पंडित मनीष झा ने जानकारी दी कि हिंदू पंचांग के मुताबिक हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ रही है. वहीं शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया है कि वो उनके भक्तों को परेशान नहीं करेंगे. शास्त्रों के मुताबिक इस संबंध में एक कथा भी है. चलिए वो कथा भी जानते हैं.

शक्ति का अहंकार

राम भक्त हनुमान अपने प्रभु की भक्ति में खोए हुए थे. उसी समय शनिदेव वहां से गुजरे. हनुमान जी को देख शनिदेव को अपनी शक्ति पर अहंकार हो गया. शनिदेव ने अपनी दृष्टि हनुमान जी पर डाली और उन्हें अपनी छाया से ढ़क लिया. उन्होंने हनुमान जी को कहा वानर देख तेरे सामने कौन आया है? शनिदेव को लगा कि उन्हें देख हनुमान जी डर जाएंगे. मगर हनुमान जी ने ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

भक्ति में खोए हनुमान जी ने काफी समय बाद अपने नेत्र खोले. उन्होंने शनिदेव को देखकर सहजता से पूछा की महाराज आप कौन है? हनुमान जी के इस प्रश्न से शनिदेव क्रोधित हो गए. उन्होंने हनुमान जी से कहा कि तुम मेरी शक्ति से वाकिफ नहीं हो, मैं शनि हूं. मैं तुम्हारी राशि में प्रवेश करने जा रहा हूं. हनुमान जी ने शनिदेव की बात सुनने के बाद कहा कि मैं तो अपने प्रभु की भक्ति में लीन था. आप किसी और के पास जाएं और मेरे ध्यान में बाधा न डालें.

हनुमान जी के इस जवाब से शनिदेव अधिक क्रोधित हो गए. उन्होंने हनुमान जी की बांह पकड़ ली. इससे हनुमान जी को लगा कि उनकी बांह को किसी ने अंगारों पर रख दिया है. उन्होंने अपनी बांह को शनिदेव की पकड़ से छुड़ा लिया. इसके बाद शनिदेव ने विकराल रुप धारण कर हनुमान जी की दूसरी बांह पकड़ने की कोशिश की जिसपर हनुमान जी क्रोधित हो गए. उन्होंने शनिदेव को पूंछ में लपेट लिया.

शनिदेव ने कहा तुम हो या तुमहारे राम कोई भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. हनुमान जी ने जैसे ही ये शब्द सुने उन्होंने क्रोधित होकर शनिदेव को अपनी पूंछ में लपेट लिया. उन्होंने शनिदेव को पहाड़ों और वृक्षों पर पटका. शनिदेव ने मदद के लिए सभी देवी देवताओं को पुकारा मगर किसी ने उनकी मदद नहीं की. इसके बाद शनिदेव समझ गए कि हनुमान जी कोई मामूली वानर नहीं है.

अंत में शनिदेव ने अपने अहंकार का त्याग किया और हनुमान जी से कहा की मैं आपकी छाया से भी दूर रहूंगा. इसके बाद हनुमान जी ने शनिदेव से अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखने के लिए भी वचन लिया. हनुमान जी ने कहा कि तुम मेरे भक्तों से भी दूर रहोगे. शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया और अपने किए के लिए उनसे क्षमा मांगी. हनुमान जी ने शनिदेव को क्षमा किया. अपने वचन के मुताबिक शनिदेव कभी भी हनुमान जी के भक्तों को परेशान नहीं करते.

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