कोरोना संकट में एड्स के इलाज में पिछड़ी दुनिया, WHO ने कहा 2030 तक खत्म करना संभव नहीं

चीन के वुहान से निकले जानलेवा कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। कोरोना मरीजों की जान बचाने की कोशिश में एड्स जैसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं मिल सका। नतीजा ये रहा है कि एड्स के विरुद्ध लड़ाई में दुनिया काफी पिछड़ गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)  ने भी इस बात का स्वीकारा है कि साल 2030 तक एड्स को दुनिया से खत्म कर देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ये लगता है कि अब ये लक्ष्य साल 2030 तक पूरा नहीं हो सकेगा।

एचआईवी के 17 लाख मरीज

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2016 में और साल 2020 तक एचआईवी संक्रमण के मामले पांच लाख से कम पर लाने का लक्ष्य तय किया था लेकिन साल 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक एचआईवी संक्रमितों की संख्या 17 लाख थी यानि लक्ष्य से तीन गुना से भी अधिक। इन आंकड़ों ने WHO को भी चिंता में डाल दिया है।

2019 में एड्स ने ली 6 लाख 90 हजार जानें

WHO की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में एड्स संक्रमण के चलते दुनिया भर में 6 लाख 90 हजार लोगों की मौत हुई। जोकि बीते सालों की तुलना में काफी अधिक थी। रिपोर्ट बताती है कि सामान्यतः हर साल इसके कारण लगभग पांच लाख लोगों की जान जाती थी।

एड्स मामलों की यूएन संस्था की प्रमुख विनी ब्यानयिमा (Winnie Byanyima) ने कहा कि वर्ष 2030 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य ख़तरे के रूप में एड्स के खात्मे का लक्ष्य अब भी हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बहुत से देशों से मिले आंकड़ों के आधाक पर कहा जा सकता है कि तथ्य-आधारित रणनीतियां और मानवाधिकार केन्द्रित उपाय अपना कर एचआईवी के खात्मे के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है।

एड्स के विरुद्ध लड़ाई में मौजूदा विषमताएँ, वर्ष 2030 तक इस सार्वजनिक स्वास्थ्य ख़तरे को जड़ से उखाड़ फेंकने के लक्ष्य के लिये एक बड़ा ख़तरा हैं। एंतोनियो गुटेरेश, महासचिव, संयुक्त राष्ट्र

WHO ने इससे निपटने के लिए कुछ सिफारिशें की हैं।

इनमें विषमताओं को दूर करने और एचआईवी के जोखिम का सामना कर रहे सभी लोगों तक पहुंचने सहित, अन्य मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।

एचआईवी टैस्टिंग और उपचार में कमियों को दूर करने का आग्रह किया गया है।

लैंगिक समानता और महिलाओं व लड़कियों के मानवाधिकारों पर ज़ोर दिया गया है।

अन्य उपायों में एचआईवी की रोकथाम को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जोखिम झेल रहे 95 फ़ीसदी लोगों के पास रोकथाम का विकल्प हो और बच्चों में नए संक्रमण का उन्मूलन किया जाए।

Rajesh Ranjan Singh

Sr. Journalist, Writer, Delhi College of Arts & Commerce/Delhi University alumni.

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