तनाव कम करने के लिए जामिया में सेमिनार

कोरोना वायरस महामारी के दौरान कई मामलों में देखने में आया है कि लोगों को तनाव हो रहा है. इस समय अलग अलग कारणों से लोगों को तनाव हो रहा है. वहीं तनाव को दूर करने के तरीकों पर विचार करने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्कृत विभाग ने सोमवार को ‘गूगल मीट’ पर ‘परीक्षाएं और तनाव-प्रबन्धन’ विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया.

यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो नजमा अख़्तर ने संस्कृत विभाग की इस पहल का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बीते दिनों ऐसे चार सत्र हुए हैं जिनके जरिए 800 अध्यापकों को फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया. ये यूनिवर्सिटी की लगन ही है कि लॉकडाउन में भी यूनिवर्सिटी के छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस मिल रही है.

संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश चन्द्र पन्त ने कहा कि विश्व भर में फैले कोरोना वायरस का सार्थक प्रयासों से मुकाबला करना सबसे जरूरी है. जामिया के छात्र-छात्राओं ने घर पर रहकर ही अत्यन्त मनोबल और एकाग्रता से ऑनलाइन अध्ययन के माध्यम से सिद्ध कर दिया है कि उन्नत समाज निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे उपर है.

वेबिनार में ‘राष्ट्रपति सम्मान प्रमाण पत्र‘ से सम्मानित, संस्कृत की प्रख्यात विद्वान, प्रो. दीप्ति त्रिपाठी, स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय के भाषा शास्त्र के व्याख्याता प्रो. हेंज वर्नर वेसलर ,महात्मा गाँधी अन्तर्रष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व-कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र, दिल्ली विश्वविद्यालय की संस्कृत अध्यापिका डॉ अंजू सेठ, एमिटी विश्वविद्यालय के संस्कृत अध्यापक डॉ. श्रुति कान्त पाण्डेय, डॉ. लाला शङ्कर गयावाल, डॉ. राजवीर शास्त्री, डॉ. विश्वजीत, डॉ पी. सी. यादव आदि ने अपने विचार रखे.

जामिया के ‘मेंटल हेल्थ और काउंसलिंग समिति’ के अध्यक्ष प्रो. एस. एम. साजिद इस आयोजन में विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शामिल हुए. आपको बता दें कि इस वेबिनार से जुड़ने के लिए 600 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया जिसमें से 250 शोध छात्रों और विद्वानों ने ‘गूगल मीट’ के माध्यम से हिस्सा लिया.

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