शिक्षकों का ऐलान, अपने वेतन से जमा करेंगे मुआवजा राशि

नई दिल्ली. कोरोना वायरस काल में उत्तर प्रदेश में 1621 शिक्षकों की मौत हुई है. इन शिक्षकों के परिवारों के लिए मुआवजा राशि दिलवाए जाने के लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ लंबे समय से संघर्ष कर रहा है. मगर सरकार के कानों पर इनकी मांगों को लेकर जूं तक नहीं रेंग रही.

कोरोना संक्रमण से हुई 1600 शिक्षकों की मौत

वहीं कोरोना के दौरान उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का जो आयोजन हुआ, उसमें ड्यूटी करते हुए कई शिक्षकों की मौत हुई है. शिक्षकों की मौत के आंकड़ों को लेकर शिक्षक संगठन और सरकार ने ठनी हई है. इसी बीच शिक्षक संगठन ने ऐलान कर दिया है कि जबतक सरकार मृतक शिक्षकों को मुआवजा राशि नहीं देगी तबतक परिवारों को राहत देने के लिए शिक्षक खुद इसका इंतजाम कर लेंगे.

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दरअसल उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने निर्णय लिया है कि कोरोना वायरस काल में शहीद हुए शिक्षकों व कर्मचारियों के परिवारों को लगभग 80 करोड़ रुपये अपने वेतन से देंगे. शुक्रवार को संघ की वर्चुअल मीटिंग में ये निर्णय लिया गया. इस संबंध में संघ ने उत्तर प्रदेश स्कूल शिक्षा के महानिदेशक को पत्र भी लिखा है.

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इस पत्र के संदर्भ में संघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया गया कि उत्तर प्रदेश के सभी शिक्षकों ने मुख्यमंत्री कोष में एक दिन का वेतन जमा किया था. ये राशि 76 करोड़ रुपये थी. यही नहीं सरकार ने तीन बार महंगाई भत्ते का भुगतान भी नहीं किया. सिर्फ बेसिक शिक्षकों के महंगाई भत्ते की राशि 2000 करोड़ रुपये से अधिक की है.

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इतनी राशि शिक्षकों के खाते से लिए जाने के बाद भी मृतक शिक्षकों के परिवार को आर्थिक सहयोग न दे पाना बहुत दुखद है. यही नहीं जिन शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में तैनात किया गया उन्हें किसी तरह की प्रोटेक्टिव गेयर्स भी नहीं दिए गए मसलन मास्क, ग्लव्स आदि. ऐसे हालातों में ड्यूटी करते हुए 1621 शिक्षकों की मौत कोरोना के कारण हुई.

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इस संबंध में संघ ने सरकार से मुआवजा जारी करने की मांग की मगर सरकार ने मात्र तीन शिक्षकों की मृत्यु की पुष्टि की. इसके बाद अब शिक्षकों ने निर्णय लिया है कि उनके द्वारा जमा की गई 76 करोड़ रुपये की राशि में से ही सभी मृतकों के परिवारों को बराबर राशि बांट दी जाए. इसके अलावा सरकार से भी मुआवजा दिए जाने की मांग की जाएगी.

ये है संघ की मांग

संघ ने मांग की है कि कोरोना से जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए. मृतक शिक्षकों के परिवार को 1 अप्रैल 2005 से पूर्व लागू पूरानी पेंशन स्कीम के तहत पेंशन की सुविधा दी जाए. जिन मृतकों के आश्रित नौकरी लेने के योग्य हों उन्हें नौकरी देकर नियुक्त किया जाए. वहीं ऐसे मृतक जो 60 वर्ष से कम आयु के थे उनके परिवार को ग्रेच्युटी की धनराशि भी दी जाए.

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राज्य में जो भी शिक्षक कोरोना संक्रमित है सभी को कोरोना वॉरियर घोषित किया जाए. जिन शिक्षकों कोरोना का इलाज चल रहा है उन्हें इलाज का संपूर्ण खर्चा भुगतान किया जाए. वहीं चुनाव के दौरान जो शिक्षक बीमारी के कारण ड्यूटी नहीं दे सके उनके खिलाफ की जा रही प्रशासनिक कार्यवाही को निरस्त किया जाए. शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न करवाया जाए.

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