अब जन सुनवाई के आसरे पर डॉक्टर

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश ने डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ का उत्साहवर्धन करने की गुजारिश की थी. जनता ने पीएम की बात का मान रखते हुए कभी स्वास्थ्य कर्मियों पर फूल बरसाए तो कभी दिये जलाए. मगर अब उनकी पार्टी के शासन वाली राज्य सरकारें भी उनके आदेशों की अवहे्लना करती नजर आ रही है.

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दरअसल मामला है उत्तर प्रदेश का. यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखने के बाद भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल स्टूडेंट्स नेटवर्क के मांगों पर कोई सुनवाई नहीं की गई. थक हार कर एसोसिएशन के सदस्यों ने योगी आदित्यनाथ के समक्ष जनसुनवाई की अपील की थी. मगर मुख्यमंत्री के पास इतना समय भी नहीं है कि वो कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे डॉक्टरों की परेशानी को सुन लें.

आखिर में डॉक्टरों की इस सुनवाई को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है. अब ये सुनवाई कब शुरु होगी इसका भी कोई तय समय निश्चित नहीं किया गया है. अब सरकार के ऐसे व्यवहार से एसोसिएशन के सदस्य बहुत आहात हैं. सदस्यों का कहना है कि सरकार के पास हमारी बात सुनने की फुरसत नहीं है. हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुनवाई का आग्रह किया था, जिसे खुद ही स्वास्थ्य विभाग के पास भेज दिया गया. मुख्यमंत्री के पास डॉक्टरों के लिए भी समय नहीं है.

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इस मामले पर आईएमए स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई की सेक्रेट्री साक्षी सिंह ने बताया कि आज कोरोना का ये दौरान बहुत कठिन समय है. जब आम जनता घर से निकलने से भी कतरा रही है उस समय में डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने में जुटे हुए हैं. उन्हीं डॉक्टरों की आवाज सुनने के लिए भी सरकार या मुख्यमंत्री के पास समय नहीं है. ये बहुत ही दुखद है कि डॉक्टरों की मांगों पर सुनवाई की जगह इधर से उधर भेजा जा रहा है.

ये हैं एसोसिएशन की मांग

दरअसल राज्य में कोविड ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों को पीपीई किट, मास्क, ग्लव्स व अन्य सुरक्षा सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही है. डॉक्टरों को इनकी अधिक जरूरत है जबकि आपूर्ति कम की हो रही है. ऐसे में डॉक्टर खुद अपने पैसे खर्च कर पीपीई किट, मास्क इस्तेमाल करने को मजबूर हो रहे हैं. जानकारी के मुताबिक सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपंड में बढ़ोतरी की मांग भी की जा रही है.

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वहीं मामले पर आईएमए स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई के स्टेट कन्वीनर लखन प्रकाश गुप्ता ने बताया कि साढ़े चार साल पढ़ाई करने के बाद भी डॉक्टरों का फाइनल एग्जाम नहीं लिया जा रहा. पीजी एग्जाम को रोकने से डॉक्टर मानसिक परेशानी झेल रहे हैं. एक तरफ कोरोना संक्रमण के दौरान इलाज करने का दबाव दूसरी ओर सरकार का ऐसा व्यवहार. डॉक्टरों पर दोहरी मार पड़ रही है.

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