उर्दू ट्रांसलेटरों को नौकरी आखिर कबतक?

नई दिल्ली. बिहार में युवाओं को नौकरी की दरकार है. इसी कड़ी में एक बार फिर से बिहार के उर्दू ट्रांसलेटर आक्रोषित हो चुके है. बिहार में कर्मचारी चयन आयोग में उर्दू अभ्यार्थियों का रिजल्ट अबतक घोषित नहीं किया है. रिजल्ट घोषित किए जाने की मांग को लेकर उर्दू ट्रांसलेटर सोशल मीडिया पर प्रदर्शन कर रहे है.

उर्दू ट्रांसलेटरों के हल्ला बोल को मिला ”रोहिणी” का साथ

गौरतलब है कि 2019 में उर्दू ट्रांसलेटरों के बिहार में 1500 से अधिक पदों भर्ती निकाली गई थी. इन पदों पर नियुक्ति के लिए ट्रांसेलटरों की परीक्षा ली गई. हालांकि परीक्षा में कोरोना संक्रमण के कारण थोड़ा विलम्ब हुआ. फरवरी 2021 में संबंधित परीक्षा का आयोजन किया गया.

ट्वीटर पर नियुक्ति के लिए आवाज उठाएंगे युवा

सरकार ने चार महीने बीतने के बाद भी अबतक उर्दू ट्रांसेलटरों का रिजल्ट घोषित नहीं किया है. रिजल्ट का इंतजार कर रहे ताबिश का कहना है कि इन पदों पर प्रदेश के 60 हजार से अधिक अभ्यार्थियों ने आवेदन किया था. संबंधित पद के लिए परीक्षा का आयोजन फरवरी में किया गया. परीक्षा लेने के बाद चार महीने बीत चुके हैं मगर अभ्यार्थियों को अबतक रिजल्ट नहीं मिला है.

अब ट्रांसलेटर भर्ती के लिए होगा हल्ला बोल

2019 की भर्ती का रिजल्ट 2021 तक घोषित नहीं हुआ है. इस लेटलतिफी के कारण अभ्यार्थियों में नाराजगी है. अभ्यार्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि उनका रिजल्ट जल्द से जल्द घोषित किया जाए ताकि आगे की प्रक्रिया भी तय समय पर पूरी हो सके.

अलग लेवल में होगा एग्जाम

दरअसल इस परीक्षा के तीन लेवल है. इसमें एक प्री, मेन्स और फिर इंटरव्यू होगा. अब सरकार ने घोषणा की है कि जुलाई में रिजल्ट जारी होगा. ऐसे में मेन्स एग्जाम कब होगा और उसका नतीजा कब जारी होगा.

सुप्रीम कोर्ट के ये हैं आदेश

सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में पहले कह चुका है कि भर्ती प्रक्रिया को अधिकतम नौ महीनों में पूरा किया जाना चाहिए. मगर बिहार में सालों बीतने के बाद भी भर्ती नहीं की जाती है.

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