बिहार में उर्दू अनुवादकों का सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा

नई दिल्ली. बिहार में उर्दू अनुवादकों को रिजल्ट का इंतजार है. रिजल्ट की आस लगाए युवाओं का गुस्सा रविवार को ट्वीटर पर फूटा. इस दौरान हजारों की संख्या में युवा उर्दू अनुवादकों (ट्रांसलेटरों) ने बिहार सरकार के खिलाफ आवाज उठाई. रिजल्ट घोषित किए जाने की मांग को लेकर युवाओं ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में युवा हल्ला बोल ने भी हिस्सा लिया.

कोरोना की पड़ी मार, अप्रैल में 75 लाख लोग हुए बेरोजगार

बता दें कि बीएसएससी के तहत सहायक उर्दू अनुवादक की परीक्षा का आयोजन 28 फरवरी 2021 को किया गया था. हालांकि ये परीक्षा 2021 साल के लिए नहीं थी. बल्कि ये परीक्षा 2019 में आए नोटिफिकेशन के लिए आयोजित की गई थी. दरअसल कोरोना संक्रमण के कारण परीक्षा स्थगित की जाती रही.

PUBG MOBILE New Updates goes live, brings more Fun for the gamers

वहीं अब फरवरी में परीक्षा का आयोजन किए जाने के बाद अबतक अभ्यार्थियों का रिजल्ट घोषित नहीं किया गया है. अभ्यार्थी लगातार रिजल्ट घोषित किए जाने की मांग कर रहे है. इसी सिलसिले में रविवार को भी अभ्यार्थियों ने ट्वीटर पर बिहार में नीतिश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. गौरतलब है कि 2019 में उर्दू ट्रांसलेटरों के बिहार में 1500 से अधिक पदों भर्ती निकाली गई थी. इन पदों पर नियुक्ति के लिए ट्रांसेलटरों की परीक्षा ली गई.

ट्वीटर पर नियुक्ति के लिए आवाज उठाएंगे युवा

रिजल्ट का इंतजार कर रहे ताबिश का कहना है कि इन पदों पर प्रदेश के 60 हजार से अधिक अभ्यार्थियों ने आवेदन किया था. संबंधित पद के लिए परीक्षा का आयोजन फरवरी में किया गया. परीक्षा लेने के बाद चार महीने बीत चुके हैं मगर अभ्यार्थियों को अबतक रिजल्ट नहीं मिला है.

अब ट्रांसलेटर भर्ती के लिए होगा हल्ला बोल

2019 की भर्ती का रिजल्ट 2021 तक घोषित नहीं हुआ है. इस लेटलतिफी के कारण अभ्यार्थियों में नाराजगी है. अभ्यार्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि उनका रिजल्ट जल्द से जल्द घोषित किया जाए ताकि आगे की प्रक्रिया भी तय समय पर पूरी हो सके.

अलग लेवल में होगा एग्जाम

दरअसल इस परीक्षा के तीन लेवल है. इसमें एक प्री, मेन्स और फिर इंटरव्यू होगा. अब सरकार ने घोषणा की है कि जुलाई में रिजल्ट जारी होगा. ऐसे में मेन्स एग्जाम कब होगा और उसका नतीजा कब जारी होगा.

सुप्रीम कोर्ट के ये हैं आदेश

सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में पहले कह चुका है कि भर्ती प्रक्रिया को अधिकतम नौ महीनों में पूरा किया जाना चाहिए. मगर बिहार में सालों बीतने के बाद भी भर्ती नहीं की जाती है.

The Depth

TheDepth is India's own unbiased digital news website.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: