अब ट्रांसलेटर भर्ती के लिए होगा हल्ला बोल

नई दिल्ली. देश व्यापी युवा आंदोलन युवा हल्ला बोल ने बिहार सरकार पर फिर निशाना साधा है. अबकी बार युवाओं के साथ मिलकर ट्रांसलेटरों की लिए आवाज उठाई गई है. नीतीश कुमार सराकर को युवाओं की परेशानियों से अवगत कराने के लिए अब रविवार यानी 30 मई को एक बार फिर ट्वीटर पर युद्ध छिड़ेगा.

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इस बार युवा हल्ला बोल ने उर्दू ट्रांसलेटरों के हक के लिए लड़ाई शुरु की है. दरअसल उर्दू ट्रांसलेटरों के 1500 से अधिक पदों के लिए ये भर्ती 2019 में निकाली गई थी. मगर कोरोना संक्रमण के कारण इसकी परीक्षा 28 फरवरी 2021 में ली गई. इसके बाद अबतक सरकार ने इस परीक्षा का रिजल्ट घोषित नहीं किया है.

दो साल में नहीं आया रिजल्ट

इस संदर्भ में अब युवा हल्ला बोल, सहायक उर्दू अनुवादक आदि मिलकर ट्वीटर पर अभियान चलाएंगे. इसके जरिए मांग की जाएगी कि उर्दू अुवादकों की परीक्षा का रिजल्ट जल्द से जल्द घोषित किया जाए. इस संबंध में हमने बात की ताबिश आलम से. उन्होंने बताया कि राजभाषा विभाग में उर्दू अनुवादक के लिए 1500 से अधिक पदों पर भर्ती निकाली गई थी.

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इन पदों पर नौकरी पाने के लिए प्रदेश भर के 60 हजार से अधिक अभ्यार्थियों ने आवेदन किया था. इन सभी अभ्यार्थियों की परीक्षा फरवरी में हुई. मगर अबतक इनका रिजल्ट जारी नहीं हुआ है. दो सालों बाद तो परीक्षा हुई उसका रिलज्ट घोषित करने में भी इतना समय लग रहा है.

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ताबिश ने बताया कि कुछ समय पहले जानकारी मिली थी कि रिजल्ट जुलाई में जारी होगा. ऐसे में हमारी मांग है कि सरकार जुलाई में ही रिजल्ट की घोषणा करे. सरकार कोरोना संक्रमण का बहाना बनाकर इन नियुक्तियों को अधिक समय के लिए न टाले. ये नियुक्तियां वैसे भी 2019 में होनी थी जो दो साल देरी से हो रही है.

बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 2019 में 1500 पदों पर सहायक उर्दू अनुवादक की भर्ती निकाली गई. 2 साल हो जाने पर भर्ती अब तक पूरी नहीं हुई है. वैसे भर्तियों में देरी का उदाहरण देना हो तो बिहार एसएससी इसके लिए सबसे सटीक होगा. इस आयोग द्वारा 2014 के LDC परीक्षा अभी तक लटकाया गया है. उर्दू अनुवादक लगातार आंदोलित हैं, इस संघर्ष में युवा हल्ला बोल इनके साथ है. हमारी मांग है कि आयोग उक्त भर्ती का परीक्षा परिणाम अविलंब जारी करे. इस संबंध में 30 मई को अभ्यर्थियों के समर्थन में #DECLARE_RESULT_BSSC_URDUTRANSLATOR के साथ ट्विटर कैंपेन होगा. सरकार अगर नहीं मानती है तो कोरोना के हालात सुधरने के बाद हम सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे.
– गोविन्द मिश्रा, नेशनल कोऑर्डिनेटर, युवा हल्ला बोल

29 साल बाद आई नियुक्तियां

इस संबंध में हमने बात की यूथ फॉर स्वराज के यूथ कैबिनेट मेंबर अंकित से. उन्होंने बताया कि बिहार सरकार की आदत है कि वो बार बार रिजल्ट को डिले करती है. परीक्षाएं ली जाती हैं मगर समय पर उनकी नियुक्तियां पूरी नहीं होती. उर्दू ट्रांसलेटर के लिए सरकार ने 1990 के बाद के बाद 2019 में नियुक्तियां निकाली. 29 सालों तक सरकार ने इस पद के लिए कोई नियुक्ति की ही नहीं. इस दौरान सिर्फ एडहॉक व अन्य तरीकों से नियुक्तियां की गई.

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अब 2019 में निकाली गई नियुक्तियों का रिजल्ट अबतक जारी नहीं किया है. दरअसल इस परीक्षा के तीन लेवल है. इसमें एक प्री, मेन्स और फिर इंटरव्यू होगा. अब सरकार ने घोषणा की है कि जुलाई में रिजल्ट जारी होगा. ऐसे में मेन्स एग्जाम कब होगा और उसका नतीजा कब जारी होगा.

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सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में पहले कह चुका है कि भर्ती प्रक्रिया को अधिकतम नौ महीनों में पूरा किया जाना चाहिए. मगर बिहार में सालों बीतने के बाद भी भर्ती नहीं की जाती है.

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