कोरोना संक्रमित डॉक्टर हैं चूहों के बीच रहने को मजबूर, दिल्ली सरकार से यूनियन ने कार्रवाई करने की मांग

नई दिल्ली. दिल्ली सरकार के अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर कोरोना संक्रमित है. इलाज के लिए संबंधित डॉक्टर को जिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है उसकी स्थिति हैरान करने वाली है.

दरअसल दिल्ली के जग प्रवेश अस्पताल में कार्रयत डॉक्टर ने यूनाइडेट रेजिडेंट एंड डॉक्टर एसोसिशन इंडिया को पत्र लिखकर अपनी वर्तमान स्थिति और परेशानी के बारे में बताया था. वहीं कोरोना वॉरियर डॉक्टर जो अभी खुद कोरोना संक्रमण से जूझ रही है उसकी ऐसी हालत होना निंदनीय है.

वहीं एसोसिएशन ने इस संबंध में दिल्ली सरकार का ध्यान भी खींचने की कोशिश की है. एसोसिएशन ने लिखा है कि संबंधित डॉक्टर को सही प्रकार से इलाज मिलना जरूरी है. इसी के साथ दिल्ली सरकार की गाइडलाइन के तहत उसे अस्पताल में इलाज दिया जाना चाहिए.

वहीं जिस अस्पताल में डॉक्टर भर्ती है वहां ऐसी अनिमितताए सामने आना सकारात्मक संदेश नहीं है. ऐसे में संबंधित अस्पताल के खिलाफ भी सरकार को सख्त कदम उठाते हुए कार्रवाई करनी चाहिए.

ये था मामला

TheDepthNews ने पहले भी इस खबर को प्रमुख्ता से चलाया था. ये पूरा मामला है दिल्ली का. गाजियाबाद की रहने वाली और दिल्ली के जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में कार्यरत एक डॉक्टर को अचानक आज से लगभग एक सप्ताह पहले यानी 19 अप्रैल को बुखार आ गया.

बहन भेजी गई आइसोलेशन में

बुखार के कारण जब जांच की गई तो डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाई गई. इसके बाद उन्हों घर भेजा गया और वहां से सीएचसी, मुरादनगर ट्रांसफर किया गया. जबकि डॉक्टर की बहन को आइसोलेशन के लिए पास के ही अस्पताल ले जाया गया.

चूहों से भरा कमरा

पीड़ित डॉक्टर का कहना है कि इस मामले में मुरादनगर अस्पताल के सीएमओ ने काफी मदद की और अलग से रूम भी दिलवाया. मगर उस कमरे की हालत मरीज तो क्या एक आम व्यक्ति के रहने के लिए भी सेहत के लिए लिहाज से सही नहीं है. डॉक्टर के मुताबिक कमरे में कई जूहें है, जो कभी भी इधर उधर कूदते रहते हैं.

संक्रमित हालत में जब कोरोना से बचाव के लिए सरकार हर स्तर पर ऐहतियात बरतने को कहती है, और उस समय में संक्रमित व्यक्ति को चूहों के साथ रखना न सिर्फ हास्यास्पद है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े करता है.

कॉमन वॉशरूम

डॉक्टर ने अपनी शिकायत में लिखा कि उन्हें जिस अस्पताल में भर्ती किया गया है वहां पुरूष और महिलाओं के लिए साफ टॉयलेट की भी व्यवस्था नहीं है. यहां हालात इतने खराब हैं कि पुरुष और महिलाएं एक ही टॉयलेट का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं.

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