भारत के कोरोना स्ट्रेन को लेकर परेशान हुआ पूरा विश्व

पूरे भारत में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में रोजाना करीब 3 लाख नए इंफेक्शन केस सामने आ रहे हैं. इस तेज रफ्तार इंफेक्शन में कोरोना के बी.1.617 के भारतीय स्ट्रेन की कितनी भागीदारी है, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इस बात का संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि वायरस के तेजी से फैलने में नए प्रकार के म्यूटेशन की भूमिका है. कोरोना के इस स्ट्रेन को लेकर विश्व भर में चर्चा और चिंता का दौर जारी है.

कोरोना के भारतीय रूप वाले म्यूटेशन को E484Q/E484K का नाम दिया गया है. ये अंजाने बदलाव नहीं हैं. वे कोरोना के दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन बी.1.353 और ब्राजील वाले P1 में भी शामिल हैं. कुछ मामलों में ये ब्रिटिश स्ट्रेन बी.1.1.7 में भी पाया गया है.

दुनिया में हो रही चिंता से अलग विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारतीय स्ट्रेन को ‘वेरिएंट ऑफ इंटेरेस्ट’ कहा है. इसका मतलब है कि उस पर नजर रखी जा रही है लेकिन अभी उसे चिंताजनक नहीं माना जा रहा है. वेलकम सेंगर इंस्टीट्यूट में कोविड-19 जेनोमिक्स इनीशिएटिव के डाइरेक्टर डॉ. जेफ्री बैरेट का भी कहना है कि भारतीय स्ट्रेन पिछले महीनों में बहुत तेजी से नहीं फैला है. उनके विचार में ये बी.1.1.7 की तरह फैलने वाला नहीं है.

रिपोर्टेस पर गौर करें तो भारत में महाराष्ट्र प्रांत में कोरोना से हुए संक्रमण का 60 फीसदी बी.1.617 की वजह से हुआ है. यह बात जिनोम सिक्वेंस से पता चली है. लेकिन साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्पष्ट रूप से कहने के लिए कि संक्रमण की वजह बी.1.617 है, जिनोम सिक्वेंसिंग की संख्या बहुत छोटी है.

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