तेलंगाना सरकार ने बढ़ाई कोरोना वॉरियर्स की परेशानी, मेडिकल पीजी की फीस बढ़ाई

नई दिल्ली. तेलंगाना सरकार ने मेडिकल फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री करने वालों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है. कोरोना संकट के बीच एक तरफ जहां रेजिडेंट डॉक्टर भी निरंतर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं वहीं सरकार ने रेजिडेंट डॉक्टरों का शुक्रिया करने की बजाय उनके सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है.

तेलंगाना सरकार ने पीजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए फीस बढ़ा दी है. कोटा सीट की फीस जो अबतक 7 लाख रूपये वसूली जाती थी. उसे बढ़ाकर सरकार ने 7.75 लाख कर दिया है. इससे मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. सरकार ने फीस बढ़ाने का आदेश जारी कर दिए है.

सरकार के नए आदेश के बाद प्राइवेट कॉलेज हो या सरकारी कॉलेज सभी की फीस बढ़ गई है. अगर बी श्रेणी की बात हो तो जो फीस पहले रु 24.20 लाख थी. अभी भी ये फीस कुछ कॉलेजों में उतनी ही है. वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों को अधिकतम 72 लाख रुपये प्रति सीट की श्रेणी में जमा करने की मंजूरी दी गई है.

इसी कड़ी में अगर डेंटल पीजी कोर्स की बात करें तो ए कैटेगरी की फीस 5.15 लाख रुपये और बी कैटेगरी के लिए फीस अब 8 लाख रुपये हो गई है. सी कैटेगरी के लिए अब ये राशि 12 लाख रूपये हो गई है. इससे पहले सरकार ने सिर्फ 3 साल पहले ही मेडिकल पीजी की फीस बढ़ाई थी. तब सरकार ने इस फीस को बढ़ाकर 6.90 लाख किया था.

फीस बढ़ोतरी को लेकर हंगामा

एक तरफ जहां सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के बीच फीस बढ़ा कर रेजिडेंट डॉक्टरों को धन्यवाद दिया है. वहीं दूसरी ओर सरकार के इस असंवेदनशील रवैये पर कांग्रेस ने भी आपत्ति जाहिर की है. इस संबंध में कांग्रेस के नेता वामशी चंद रेड्डी ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है. पत्र में उन्होंने मांग की है कि छात्रों पर बढ़ाए गए इस बोझ को वापस लिया जाए.

इस समय कोरोना वॉरियर्स के तौर पर डॉक्टर ही फ्रंटलाइन पर रहकर कार्य कर रहे हैं. इसके लिए डॉक्टर्स को जितना धन्यवाद दिया जाए कम है. वहीं राज्य सरकार के इस संवेदनहीन फैसले की कांग्रेस ने निंदा की है.

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