न इंश्योरेंस न सुविधाएं, ऑक्सीजन सेंटर में ऐसे हो रहा काम

नई दिल्ली. डॉक्टरों का कहना है कि ऑक्सीजन सिलेंडर को भरने और भरवाने के दौरान काफी ऐहतियात बरतनी पड़ती है. ऑक्सीजन सिलेंडर को संभालने में अगर इसमें जरा भी कोताही बरती जाए तो लोगों की जान भी जा सकती है. ऐसे में ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल करने वालों और इसका काम करने वालों को बहुत ऐहतियात बरती पड़ती है.

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वहीं इन दिनों दिल्ली समेत देशभर में कई जगहों पर ऑक्सीजन सिलेंडर रिफील सेंटर भी बनाए गए हैं. इन सेंटरों पर टीचर्स, डीटीसी कर्मचारी, होम गार्ड और सिविल डिफेंस के कर्मचारी शामिल हैं. खास बात है कि इन सेंटर पर लगाए गए कर्मचारियों को सिलेंडर रिफिल करने संबंधित किसी तरह की कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई है.

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इसके अलावा कर्मचारियों को सरकार ने किसी तरह के इक्वपीमेंट्स भी मुहैया नहीं कराए है. इतना ही नहीं इन कर्मचारियों का इंश्योरेंस तक नहीं कर वाया गया है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ऑक्सीजन रिफिल सेंटर पर काम कितना जोखिम भरा और खतरनाक होगा. ऐसी जगह जहां एक सिलेंडर में नहीं बल्की कई टन की संख्या में उपलब्ध रहती है. अगर ऐसी जगह किसी तरह का हादसा हो जाए तो इसका अंजाम क्या होगा ये सोचा जा सकता है.

ऑक्सीजन गैस प्लांट में 24 घंटे चलता है काम

हमारी जानकारी के मुताबिक दिल्ली में कई ऑक्सीजन गैस प्लांट का निर्माण किया गया है. मुण्डका स्थित एक गैस प्लांट कर्मचारी ने बताया इन प्लांट में काम करना बहुत जोखिम भरा काम है. लोगों की जान बचाने के लिए सिलेंडर रिफिल कर के दिए जा रहे हैं. एक दिन में लगभग 200 से 300 सिलेंडर भरे जा रहे हैं.

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बता दें कि ऑक्सीजन गैस प्लांट में टीचर्स की ड्यूटी भी लगाई गई है. मेडिकल ऑक्सीजन भरने के काम में टीचर्स की ड्यूटी लग रही है. हालांकि यहां टीचर्स का काम हर विभाग के बीच कॉर्डिनेशन बनाए रखने का होता है. वहीं टीचर्स ने इस तरह ड्यूटी लगाए जाने पर नाराजगी भी जाहिर की है. नगर निगम शिक्षक संघ की वरिष्ठ उपप्रधान विभा सिंह का कहना है कि पढ़ाई करवाने के अलावा सरकार हर काम में शिक्षकों का इस्तेमाल करती है. वहीं जब उन्हें वेतन देने की बात आती है तो सरकार और निगम दोनों राजनीति करने पर उतारू हो जाती है.

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