शिक्षकों को सौंपा शवों की निगरानी का काम, आदेश वापसी की मांग

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के विरूद्ध लड़ाई में हर व्यक्ति अपना रोल अदा कर रहा है. इसी कड़ी में दिल्ली नगर निगम के शिक्षक भी ऑनलाइन क्लास लेते हुए बच्चों को पढ़ाने का काम सुचारू रूप से कर रहे हैं. मगर सरकार के लिए शिक्षकों का पढ़ाना ही काफी नहीं है. इसलिए सरकार शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा अन्य कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंपती है. बात अगर शिक्षक पद की गरिमा बढ़ाए जाने की हो तो शिक्षक शायद बर्दाश्त भी कर ले मगर सरकार समय समय पर शिक्षकों को मानसिक, शारीरिक शोषण करने का मौका नहीं छोड़ती.

ऐसा ही कुछ हाल ही में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों के साथ भी हुआ है. दिल्ली सरकार की ओर से एक नोटिस जारी कर कहा गया है कि निगम स्कूल में तैनात शिक्षकों की ड्यूटी अब कोरोना संक्रमण से मरने वालों के शव की निगरानी करने के लिए की जाएगी. शिक्षकों की ड्यूटी सुबह छ बजे से शुरु होगी जो अगले दिन के छ बजे तक चलेगी. यानी शिक्षकों को 24 घंटे कोविड से मरने वालों के शवों की निगरानी का काम करना होगा. 24 घंटे की ड्यूटी के लिए दिल्ली सरकार ने कुल छ शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है.

बता दें की ये आदेश उत्तर पूर्वी दिल्ली के एसडीएम की ओर से जारी किया गया है. इसमें शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से जीटीबी अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा गया है. शिक्षकों के लिए बाकायदा एक टाइमटेबल भी बनाया गया है जिसके आधार पर वो जीटीबी अस्पताल के नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.

स्कूल बंद तो अस्पताल में काम करें शिक्षक

शिक्षकों की स्थिति इतनी दयनीय है कि राशन बांटने से लेकर चुनाव करवाने में तो उनकी ड्यूटी लगाई ही जाती थी. कोरोना संक्रमण के कारण इन दिनों स्कूल बंद हैं तो शिक्षकों को अस्पताल में ड्यूटी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. यही कारण है कि अब शवों की मॉनिटरिंग में भी उनकी ड्यूटी लगा दी गई है. सरकार के इस आदेश के बाद शिक्षकों में रोष का माहौल बना हुआ है.

शिक्षक संघ ने ट्वीट कर की निंदा

इस संबंध में नगर निगम शिक्षक संघ ने ट्वीट कर इस आदेश को वापस लेते हुए शिक्षकों को ड्यूटी से मुक्त करने की मांग भी की है. संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी ने कहा कि ऐसे आदेशों के जरिए सरकार शिक्षकों को मानसिक तौर पर परेशान कर रही है. सरकार को शिक्षकों के स्वास्थ्य की चिंता करनी चाहिए मगर वो उन्हें बीमारी की तरफ धकेलने वाले काम कर रही है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए ये काम उपयुक्त नहीं है. सरकार को ये आदेश वापस लेना चाहिए और शिक्षकों को इस ड्यूटी से मुक्त करना चाहिए.

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