स्वास्थ्य दूत कर रहे अब घर घर जाकर लोगों का इलाज

नई दिल्ली. कोरोना वायरस की नई वेव में कई अधिक मामले सामने आ रहे हैं. लगातार बढ़ते मामले और सुस्त पड़ती स्वास्थ्य सेवाओं के बीच एक तबका ऐसा भी है तो कोरोना काल में दूत बनकर लोगों की सहायता कर रहा है. इस समय जब जरुरत है कि अधिक से अधिक लोग एक दूसरे की मदद करें. तो स्वास्थ्यदूतों का जिक्र होना बहुत जरूरी है. इन स्वास्थ्य दूतों से जनता व सरकार को भी सीख लेने की जरुरत है.

ये मिशन नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट द्वारा चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत कॉलोनी के संक्रमित लोगों को स्वास्थ्य दूतों की मदद से इलाज मुहैया कराया जा रहा है. साथ ही लोगों के बीच बन रहे पैनिक के माहौल को भी कम करने की कोशिश इन स्वास्थ्य दूतों की मदद से की जा रही है.

इस अभियान के तहत कोरोना संक्रमित ऐसे मरीज जिन्हें माइल्ड और मॉडरेट लक्षण हैं उन्हें घर पर आइसोलेट कर इलाज करने की पद्धति बताई जा रही है. इस अभियान की शुरुआत मंगलवार से वसंत कुंज की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्लूए) से की गई. अभियान के हिस्से के तौर पर अभी 30 लोगों को स्वास्थ्य दूत बनने की ट्रेनिंग दी गई है. इन स्वास्थ्य दूतों ने बीते तीन दिनों में इलाके के 8-10 लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट तक मुहैया कराने का काम किया है.

इस अभियान की शुरुआत करने वाले नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट के एसडीएम डॉक्टर नितिन शाक्या ने बताया कि स्वास्थ्य दूत योजना बीते एक साल से काम कर रही है. इसके तहत वॉलंटीयर्स को ट्रेनिंग दी जाती है कि वो माइल्ड और मॉडरेट लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों का इलाज घर पर रहकर कर सकें. इस योजना के जरिए अब स्वास्थ्य दूतों की मदद से घर पर रहकर भी मरीज का आसानी से ख्याल रखा जा रहा है. इसी के साथ अब लोगों में पैनिक की स्थिति नहीं बन रही है. अस्पतालों में भागदौड़ का सिलसिला भी थमा है. अस्पतालों में डॉक्टर पर मरीजों को देखने का दबाव भी कम हो रहा है. वहीं घर पर रहकर भी स्वास्थ्य दूत मरीज आसानी से ख्याल रख सकते हैं.

रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन की अध्यक्ष अमीना तलवार ने बताया कि इस प्रोग्राम से कई लोगों को लाभ हो रहा है. इस अभियान की ट्रेनिंग के तहत कई ऐसी जानकारियां दी गई जिससे अब कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करना घर पर भी संभव हो गया है. सोसायटी के लोगों में अब घबराहट का माहौल नहीं है. लोगों को पता है कि स्वास्थ्य दूत और डॉ. नितिन की गाइडेंस से घर पर भी इलाज संभव हो सकता है.

ट्रेनिंग में सीखा बहुत कुछ

अमीना का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें व स्वास्थ्य दूतों को कई जानकारियां दी गई. ऑक्सीमीटर, ब्लडप्रेशर मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर सपोर्ट लगाना आदि की ट्रेनिंग दी गई. स्वास्थ्य के लिए जरूरी जिन उपकरणों का इस्तेमाल करना नहीं आता था वो इस ट्रेनिंग के जरिए सीखा. कई इक्वीपमेंट को इस्तेमाल करने की पूरी जानकारी अब मिल गई है. पल्स जांचना, शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम होना, ब्लड प्रेशर नापना ऐसे कई स्वास्थ्य संबंधी काम घर पर आसानी से हो रहे हैं. इनके जरिए मरीज के स्वास्थ्य पर निगरानी करना आसान हो गया है. स्वास्थ्य दूत रोज डॉक्टर से सलाह की मरीजों की जानकारी उन्हें मुहैया कराते हैं.

ऑक्सीजन सिलेंडर भी खुद लगा रहे दूत

जरुरत पड़ने पर मरीज के घर जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने का काम भी अब दूत खुद कर रहे हैं. बीते कुछ दिनों में 8 से 10 मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट दिलवाया गया है. ऑक्सीजन संबंधित जानकारी लेने के लिए या किसी शंका को दूर करने के लिए भी डॉक्टर स्वास्थ्यदूत के साथ वीडियो कॉल पर मौजूद रहते हैं.

देखें ऐसे मिली स्वास्थ्य दूत बनने की ट्रेनिंग

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