गर्मियों में होती हैं ये बीमारियां, ये हैं लक्षण और बचाव के तरीके

नई दिल्ली. गर्मियों का मौसम आ गया है. अप्रैल आते आते तेज धूप और बढ़ता पारा लोगों को परेशान करने लगेगा. इस मौसम में भी कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है. गर्मियों में कई बार धूप में निकलना पड़ता है. इस धूप का सबसे अधिक असर आंखों, स्किन, बॉडी और पाचन तंत्र पर पड़ता है.

गर्मियों के मौसम में कई बार जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. इस मौसम में डीहाईड्रेशन, फूड प्वाइजनिंग, स्किन रैशेज जैसी कई बीमारियां हो जाती है. अगर इनके इलाज में जरा कोताही बरती जाए तो बीमारियां स्वास्थ्य पर भारी बड़ सकती हैं.

फूड प्वाइजनिंग

गर्मियों में होने वाली सबसे आम बीमारी है फूड प्वाइजनिंग. फूड प्वाइजनिंग दूषित पानी या खाने से होती है. गर्मी के मौसम में खाने में बैक्टीरिया आसानी से पनप जाते हैं. इस मौसम में खाना भी जल्दी खराब होता है. वहीं बैक्टीरिया वाला खाना खाने से कई बार पेट दर्द. जी मचलना, उल्टी, दस्त जैसी परेशानियां होने लगती हैं. इससे बचने का सबसे सही उपाय है कि घर पर बना ताजा खाना खाएं. ऐसा करने से फूड प्वाइजनिंग का खतरा दूर रहेगा.

डिहाइड्रेशन

गर्मी में शरीर से पसीना बहुत निकलता है. ऐसे में शरीर में पानी की काफी कमी हो जाती है. ध्यान न देने पर डीहाइड्रेशन की समस्या भी होती है. अगर डीहाइड्रेशन की तरफ ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण कुछ गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं. इन परेशानियों से बचने का सबसे सटीक उपाय है कि समय समय पर पानी पीते रहें. पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, जूस आदि से भी खुद का हाइड्रेट रख सकते हैं.

लू लगना

गर्मियों में गर्म हवा के कारण लू लग जाती है. इसे हीट स्ट्रोक भी कहा जाता है. जब अधिक समय तक धूप में रहा जाए तो हीट स्ट्रोक हो जाता है. हीट स्ट्रोक लगने के बाद जरूरी है कि समय पर इसका इलाज किया जाए नहीं तो ये पीड़ित की जान भी ले सकती है. हीट स्ट्रोक के कारण सिर दर्द, कमजोरी, बेहोशी आना आम बात है. कई मामलों में हीट स्ट्रोक के कारण ऑर्गन फेल होने की बात भी सामने आई है. हीट स्ट्रोक या लू से बचने का तरीका है कि शरीर और सिर को ठंडा रखें. पानी अधिक से अधिक पीएं और हल्का खाना खाएं. बॉडी को डीहाइड्रेट होने से बचाएं.

चिकनपॉक्स

चिकनपॉक्स या चेचक के दाने अधिकतर गर्मियों के मौसम में निकलते हैं. किसी को चेचक हो जाए तो दानों के साथ ही खुजली, फफोले, लाल दाग, तेज बुखार, सिर दर्द की समस्या भी हो जाती है. चेचक के मरीज को भूख लगनी भी बंद हो जाती है. इस बीमारी की चपेट में अधिकतर बच्चे आते हैं. इससे बचाव के लिए जरूरी है कि समय पर इसकी वैक्सीन लगवाई जाए.

खसरा

ये एक संक्रामक बीमारी है. ये श्वसन संक्रमण के कारण होती है. इस बीमारी के पीड़ित को पहले तेज बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश की शिकायत होती है. बीमारी गंभीर होने पर रैशेज, दाने, मुंह में सफेद दाग भी हो जाते हैं.

सनबर्न

अधिक समय तक धूप में रहने से सनबर्न की समस्या हो जाती है. सूर्य की तेज किरणों के कारण स्किन की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. स्किन पर लाल और दर्द भरे निशान उभर आते हैं. सनबर्न के अलावा स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ता है. सनबर्न से बचने के लिए जरूरी है कि धूप में अधिक समय के लिए निकलने से बचें. साथ ही पूरी बाजू के कपड़े पहनें और सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें.

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