रुस ने बना ली दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन, राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने किया ऐलान

दुनिया के तमाम देशों को पीछे छोड़ते हुए रूस ने कोरोनावायरस वैक्सीन बनाने में बाजी मार ली है. मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की घोषणा की, ‘हमने कोरोना की सुरक्षित वैक्सीन बना ली है और देश में रजिस्टर्ड भी करा लिया है. उन्होंने कहा कि मैंने अपनी दो बेटियों में एक बेटी को पहली वैक्सीन लगवाई है और वह अच्छा महसूस कर रही है.’ रूसी अधिकारियों के मुताबिक, Gam-Covid-Vac Lyo नाम की इस वैक्सीन को तय योजना के मुताबिक रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेग्युलेटरी बॉडी का अप्रूवल मिल गया है. बताया जा रहा है कि इस वैक्सीन को सबसे पहले फ्रंटलाइन मेडिकल वर्कर्स, टीचर्स और जोखिम वाले लोगों को दिया जाएगा.

रूस का दावा है कि यह वैक्‍सीन उसके 20 साल के शोध का परिणाम है. रिसर्चर्स का दावा है कि वैक्‍सीन में जो पार्टिकल्‍स यूज हुए हैं, वे खुद को रेप्लिकेट (कॉपी) नहीं कर सकते. रिसर्च और मैनुफैक्‍चरिंग में शामिल कई लोगों ने खुद को इस वैक्‍सीन की डोज दी है. कुछ लोगों को वैक्‍सीन की डोज दिए जााने पर बुखार आ सकता है जिसके लिए पैरासिटामॉल के इस्‍तेमाल की सलाह दी गई है.

सितंबर में उत्पादन, अक्टूबर से लगने लगेगी

दुनिया की पहली इस पहली वैक्सीन को रक्षा मंत्रालय और गामालेया नेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एपिडिमियोलॉजी एंड माइक्रोबायलॉजी ने मिलकर तैयार किया है. सितम्बर से इसका उत्पादन करने और अक्टूबर से लोगों को लगाने की तैयारी शुरू हो गई है. रूस ने दावा किया है कि उसने कोरोना की जो वैक्सीन तैयार की है वह क्लीनिकल ट्रायल में 100% तक सफल रही है। ट्रायल की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन वॉलंटियर्स को वैक्सीन दी गई उनमें वायरस के खिलाफ इम्युनिटी विकसित हुई है.

पहले फ्रंटलाइन वर्करों को लगेगी वैक्सीन

रूसी अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल वर्करों, शिक्षकों समेत उन लोगों को सबसे पहले वैक्सीन लगाई जाएगी जिनपर संक्रमण का खतरा अधिक है. वैक्सीन विकसित करने के क्रम में ही मॉस्को स्थित गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने कहा था कि वैक्सीन का प्रोडक्शन हो जाने के बाद सबसे पहला टीका फ्रंटलाइन हेल्थ वर्करों को दी जाएगी. वैज्ञानिकों ने कहा कि फ्रंटलाइन हेल्थ वर्करों को दिया जाना अधिक जरूरी है क्योंकि उन्हें आगे भी संक्रमितों के बीच रहना है.

पशुओं में कोविड-19 वायरस का स्रोत ढूंढ़ना मुश्किल

पशुओं में कोविड-19 वायरस का स्रोत ढूंढ़ना बहुत मुश्किल है. ये बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आपात कार्यक्रम के प्रधान माइकल रयान ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कही. उन्होंने कहा कि हालांकि कोविड-19 का प्रकोप सबसे पहले वुहान में पैदा हुआ. लेकिन बीते 25 वर्षों से प्राप्त अनुभवों से यह जाहिर हुआ है कि प्रारंभिक रोगी शायद संक्रामक रोगों के केंद्रित प्रकोप से नहीं आया. उसके बीमार होने का समय महामारी के प्रकोप से ज्यादा पहले था. साथ ही वह शायद अन्य जगह में रहता था. मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (मर्स) वायरस के पशु स्रोत को ढूंढ़ने में कई साल लगे. सार्स वायरस कैसे पशु से मानव तक पहुंचा, यह पहेली अभी तक हल नहीं हुई है. इसलिए पशुओं में कोविड-19 वायरस का स्रोत ढूंढ़ना भी बहुत मुश्किल है. लेकिन हम उन महत्वपूर्ण सूचना को पाने के लिये पूरी कोशिश करेंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घ्रेब्रेयसस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस हफ्ते विश्व के दायरे में कोविड-19 के पुष्ट मामलों की संख्या 2 करोड़ तक पहुंचेगी. उधर मौत के मामलों की संख्या 7.5 लाख तक पहुंचेगी. हालांकि आंकड़ों के पीछे बड़ा दुःख छिपा हुआ है, लेकिन महामारी के मुकाबले में सफलता मिलने की संभावना होगी. हालांकि अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो कई बार फिर चीन पर हमला बोल चुके हैं. पिछले साल वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला मिला था जिसके बाद से पॉम्पियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर सूचना छिपाने का आरोप लगाते रहे हैं.

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