बिहार में विकास की ऐसी बही बयार कि अस्पताल बन गया ”भूत बंगला”

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में अस्पतालों में जगह कम पड़ गई है. मरीजों को अस्पताल में बेड नहीं मिले तो कई जगहों पर ऑक्सीजन की कमी देखी गई. ऐसे में बिहार में एक अस्पताल ऐसा भी है जो लंबे समय से भूत बंगले में तब्दील हो चुका है. ये अस्पताल बिहार सरकार की उदासीनता के चलते बंद पड़ा है.

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पूरा मामला बिहार के सहरसा जिले का है. स्थानीय लोगों की मानें को यहां का चंद्रायण रेफरल अस्पताल साल 2002-03 के आस-पास ही बंद पड़ा है. आलम ये है कि इस अस्पताल का भवन जर्जर हालत में है. ऐसा कि देखने में भूत बंगले से कम नहीं लगता. इस अस्पताल भवन की हालत ऐसी हो गई है कि अस्पताल में जाने से पहले कोई सौ बार सोचेगा.

बड़े अस्पताल की भूमिका निभा सकता है

स्थानीय लोग बताते हैं कि बिहार सरकार अगर इस तरफ ध्यान दे तो ये अस्पताल कम से कम 100 बेडों का अस्पताल आसानी से बन सकता है. लगभग चार-पांच बीघा में फैला ये अस्पताल आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर है. आज के समय में कोई स्टाफ नहीं है. ऐसे में ये अस्पताल जिस उद्देश्य के साथ बनाया गया था, जनता की सेवा का वो काम पूरा नहीं कर पा रहा है.

तीन लाख आबादी को होगा फायदा

खास बात है कि अगर इस रेफरल अस्पताल को शुरु कर दिया जाए तो इससे आसपास के 10-15 पंचायत को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. इस अस्पताल के चालू होने से कम से कम तीन लाख लोगों की आबादी को इलाज मिल सकेगा. मगर सरकार को तीन लाख लोगों की सेहत की चिंता नहीं, इसलिए इस अस्पताल की ओर ध्यान नहीं है.

एक्स बीडीओ ने किया ट्वीट

युवा राजद प्रदेश उपाध्यक्ष और एक्स बीडीओ डॉ. गौतम कृष्णा ने ट्वीट कर इस अस्पताल की दयनीय स्थिति पर सरकार का ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि इस अस्पताल को जनता के फायदे के लिए खोला गया था. मगर अब जैसी हालत में ये है वो बहुत निंदनीय है. सुशासन बाबू का ये शासन है कि अच्छे अस्पताल को उन्होंने भूत बंगला बनने के लिए छोड़ दिया. आज कोरोना काल में अस्पतालों में बेडों की कमी है तो ये रेफरल अस्पताल में 100 बेड़ों की संख्या आसानी से लग सकती है. यहां डॉक्टरों की बहाली कर जनता की जान बचाई जा सकती है. उन्होंने बिहार सरकार ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस अस्पताल को पूर्ण रूप से शुरू किया जाए. यहां पर सभी प्रकार की मेडिकल फैसिलिटी से लेकर स्टाफ व डाक्टरों की भर्ती की जाए.

लालू प्रसाद यादव ने किया था अस्पताल का उद्घाटन

बता दें कि इस अस्पताल का उद्धाटन साल 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था. लेकिन कुछ साल तक चलने के बाद चंद्रायण रेफरल अस्पताल में संसाधनों की कमी होने लगी. सरकार व प्रशासन की उदासीनता के कारण इस अस्पताल की हालत जर्जर हो गई.

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बता दें कि सहरसा जिले के दर्जनों बाढ़ प्रभावित पंचायत व सैंकड़ों गावों के स्वास्थ्य का सहारा था ये रेफरल अस्पताल. मगर इसे हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर बना दिया गया. इस सेंटर में एक बेड, एक डॉक्टर और दो एएनएम की सुविधा दी गई थी. वहीं, आज जब पूरा देश कोरोना वायरस महामारी का शिकार बना हुआ है तो ये अस्पताल जनता के लिए लाइफ लाइन साबित हो सकता है. मगर इस ओर न सरकार का ध्यान है न ही स्थानीय प्रशासन का.

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