निगम पेंशनर्स हो रहे परेशान, तीन महीनों से पेंशन का इंतजार

नई दिल्ली. दिल्ली नगर निगमों की आर्थिक स्थिति कितनी खस्ता है ये किसी से छिपा नहीं है. निगम अपने कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पाती है. ऐसे में निगम के पेंशनर्स का बिना पेंशन के कैसा हाल होगा इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है. कर्मचारियों की तरह ही निगम पेंशनर्स ने भी कोर्ट में पेंशन समय पर पाने के लिए केस दायर किया हुआ है. मगर कोर्ट के तमाम आदेशों के बाद भी निगम अधिकारियों और नेताओं को जिम्मेदारी का अहसास नहीं होता.

कोरोना संक्रमण से मरने पर आश्रित को मिले नौकरी

जिन निगम शिक्षकों की सेवाओं के जरिए सालों तक स्कूल चलते रहे उन्हीं निगम शिक्षकों को सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ती है. आलम ये है कि निगम के सेवानिवृत्त शिक्षकों को कोरोना काल में भी तीन महीनों से पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है. पेंशनर्स फरवरी, मार्च और अप्रैल की पेंशन जारी होने का इंतजार ही कर रहे हैं. वहीं अब पेंशन के लिए चौथा महीना भी शुरु हो चुका है मगर पुरानी पेंशन की ही कोई जानकारी नहीं है.

वेतन के इंतजार में शिक्षक, ऐसे मांग रहे बकाया

इस संबंध में हमने बात की निगम के कुछ पेंशनर्स से. सेवानिवृत्त शिक्षक युद्धवीर सिंह ने बताया कि निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का बहुत बुरा हाल है. उन्हें 2015 से एरियर का भुगतान नहीं हुआ है. किसी तरह के मेडिकल बिल जारी नहीं किए गए है. निगम न ही समय पर वेतन देती है न ही हमारे मेडिकल बिल की भरपाई करती है. बुजुर्ग हो चुके शिक्षकों को कोई मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है. वहीं कोरोना संक्रमण के काल में सेवानिवृत्त शिक्षकों पर दोहरी मार पड़ी है.

शिक्षकों को सौंपा शवों की निगरानी का काम, आदेश वापसी की मांग

आज के समय में कई शिक्षक हैं जो दिल की बीमारी या शुगर जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं. ऐसी बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों की दवाईयों का खर्चा भी बहुत अधिक होता है मगर निगम की ओर से कोई सहायता नहीं की जाती है. शिक्षक इस उम्र में बेसहाय और लाचार महसूस करने के अलावा और कुछ नहीं कर पा रहे हैं. कई सेवानिवृत्त शिक्षक ऐसे भी हैं जिनके पेंशन के सहारे ही इन दिनों घर का गुजारा हो रहा है. मगर पेंशन नहीं मिलने से उनका जीवन यापन बहुत मुश्किलों से हो रहा है.

शिक्षकों की मांग, मिले वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

निगम के सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश जी से ने बताया कि निगम ने शिक्षकों का हाल बहुत बुरा किया हुआ है. नगर निगम सेवानिवृत्त कल्याण समिति की तरफ से कोर्ट में मामला डाला गया है. जबकि पिछले साल सेवानिवृत्त शिक्षकों को 6 महीने तक पेंशन का भुगतान नहीं हुआ था. इस बार फिर तीन महीनें हो चुके हैं और चौथा महीना शुरु हो चुका है जब पेंशन के इंतजार में सेवानिवृत्त शिक्षक बैठे हैं.

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बुजुर्गों की परेशानी कोई नहीं समझ रहा

रूंधे गले से जगदीश जी ने बताया कि कई बुजुर्गों के सामने उनके बच्चों को इस कोरोना संक्रमण ने छीन लिया. उनके उपर ही घर परिवार की जिम्मेदारी आ गई. मगर पेंशन न मिल पाने के कारण उन्हें लाचारी में दिन गुजारने पड़ रहे हैं. अधिकतर शिक्षक ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. कोरोना काल में कई सेवानिवृत्त शिक्षकों के बच्चों की भी नौकरी छूट गई. ऐसे में इनके परिवारों के लिए गुजारा करना बहुत मुश्किल हो गया है.

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दो साल से रिइंबर्समेंट का इंतजार

सेवानिवृत्त होने के बाद बीमारियों का घेरना कोई बड़ी बात नहीं है. मगर बीमारी का इलाज करवाने के बाद भी शिक्षकों को दो साल से रिइंबर्समेंट नहीं मिला है. निगम न ही समय पर वेतन का भुगतान करता है न ही कोई सेवाएं भी ठीक से मुहैया करा रहा है. जिन शिक्षकों ने 30-40 साल नौकरी में निकाले उन्हें आज दर दर पर जाकर पैसों के लिए हाथ फैलाने को मजबूर कर दिया गया है. शिक्षक और उनके परिवार बहुत दयनीय स्थिति में अपने दिन काट रहे हैं.

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सिर्फ वादों की सरकार

शिक्षकों का कहना है कि सरकार के पास गरीबों, टैक्सी ड्राइवरों को देने के लिए अनाज है मगर सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके हक की पेंशन देने की कोई सुविधा नहीं है. सेवानिवृत्त लोगों का अधिकार होता है पेंशन लेना जिससे दिल्ली सरकार और निगम ने उन्हें वंचित रखा हुआ है.

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