भव्य राम मंदिर में लगेंगे अशोक वाटिका के असली पत्थर

श्वेता ए चतुर्वेदी (स्वतंत्र पत्रकार)

अयोध्या….यानी भगवान राम की नगरी…. जहां कण कण में बसते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम राम… आस्था कहती है कि त्रेता युग में भगवान राम ने इसी पावन नगरी में जन्म लिया था… और ये आस्था आज भी कायम है…सरयू नदी के तट पर बसा ये शहर सदियों से आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है… और भगवान राम से जुड़ी आस्था इस सरयू के तट पर हर साल लाखों करोड़ों भक्तों को खींच लाती है… हिंदू धर्म में जितना जितना पावन राम का नाम माना गया है… उतनी ही पावन है अयोध्या की धरती… जो त्रेता युग के रामराज का गवाह है.. भगवान राम के अवतरण का गवाह है… तो भगवान राम के वनवास से लेकर राजतिलक का गवाह रहा है… सुप्रीम कोर्ट ने आस्था और सबूतों की बिनाह पर अयोध्या में राम मंदिर को कानूनी वैधता दी है… 134 साल से कानूनी दावपेंच में फंसे अयोध्या मामले में रामलला की जीत हुई… सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हुआ… उसके बाद यहां राम मंदिर निर्माण का काम शुरु हो चुका है…एक तरफ राम की नगरी में राम मंदिर का काम जोर शोर से चल रहा है… तो दूसरी तरफ मंदिर निर्माण के लिए देश भर से राम भक्त दिल खोलकर दान दे रहे हैं…

अब तक 3 हजार करोड़ रुपये जमा

मंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निधि समर्पण अभियान चलाया। मकर संक्रांति पर्व से शुरु हुआ ये अभियान 49 दिनों तक चला, जिसमें देश के लोगों ने राम लला की झोली को दान से भर दिया। निधि समर्पण अभियान में राजस्थान के रामभक्त सबसे आगे रहे। सूबे से सबसे ज्यादा 557 करोड़ रूपये की भारी भरकम रकम रामलला की झोली में डाली गई। तो राम मंदिर के अभियान में दक्षिण भारत के राज्य भी पीछे नहीं रहे। तमिलनाडु से 85 करोड़ रूपये की रकम राम मंदिर निर्माण के लिए भेजा गया… तो केरल के भक्तों ने 13 करोड़ की मदद की। जबकि जम्मू कश्मीर से 14 करोड़ रूपये की मदद मिली।

बेहद कामयाब रहा निधि समर्पण अभियान

अब तक देश भर से करीब तीन हजार करोड़ रुपये रामंद मंदिर ट्रस्ट को मिल चुके हैं। इस अभियान को देश के चार लाख गांवों के साथ शहरी क्षेत्रों में महाअभियान के तौर पर चलाया गया। इसमें नौ लाख कार्यकर्ता जुटे। एक लाख 75 हजार टोलियां बनाई गई थीं, जो घर-घर पहुंची। 38 हजार 125 कार्यकर्ता तो रोजाना अलग अलग तय बैंकों में रकम जमा करते थे, जिसकी हाइटेक हाईटेक मॉनिटर‍िंग की गई, ताकि मंदिर निर्माण के लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया पारदर्शी रहे। राम भक्तों की तरफ से मंदिर निर्माण के लिए दिल खोलकर खजाना लुटाने से राम मंदिर ट्रस्ट गदगद है। जिसकी वजह से ट्रस्ट ने फिलहाल विदेशी फंड स्वीकार करने की मंजूरी के लिए अभी आवेदन नहीं करने का फैसला किया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक भारत के बाहर से चंदा जुटाने का रास्ता वे तभी अपनाएंगे जब देश में ही मिलने वाला योगदान इस प्रोजेक्ट की लागत के लिहाज से कम पड़े।

राम मंदिर विस्तार के लिए ट्रस्ट ने फिर खरीदी जमीन

मंदिर निर्माण के लिए भारी भरकम फंड जुटाने के बीच ट्रस्ट की तरफ से राम मंदिर परिसर के विस्तार की कोशिशें जारी है। हाल ही में रामकोट इलाके में अशर्फी भवन से सटी चार बिस्वा भूखंड खरीदने के बाद ट्रस्ट ने आठ करोड़ की लगात के दो अलग-अलग भूखंड का रजिस्ट्री कराया है। माना जा रहा है कि मंदिर निर्माण के बाद यहां भक्तों के हुजूम उमड़ने की उम्मीद है, जमीन खरीदने की पहल को उन चुनौतियों से निपटने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है… ताकि राम भक्तों के किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।

राम मंदिर में अशोक वाटिका के पत्थर का होगा इस्तेमाल

रामलला के मंदिर में माता सीता को भी खास जगह मिलेगी। इसलिए मंदिर निर्माण में श्रीलंका के अशोक वाटिका स्थित सीता एलिया के पत्थर का भी इस्तेमाल होगा। मान्यताओं के मुताबिक सीता एलिया वो स्थान है जहां देवी सीता को दशानन रावण ने अपनी राजधानी की एक वाटिका में बंदी बनाकर करीब 11 महीने तक रखा था. इस पत्थर को भारत में नियुक्त श्रीलंका के राजदूत मिलिंदा मारागोदा मंदिर ट्रस्ट को सौंपेंगे।

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