फार्मासिस्टों को झोलाछाप कहना शर्मनाक, माफी की मांग

नई दिल्ली. इन दिनों मेडिकल फील्ड से जुड़ा हर व्यक्ति इन दिनों कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित मरीजों की किसी न किसी रुप में सेवा कर रहा है. डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, नर्सिंग स्टाफ उनकी देखभाल कर रहा है. वहीं फार्मासिस्ट हैं जो कि मरीजों को दवाईयां उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं.

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मगर अब इन्हीं फार्मासिस्ट को एक बड़े मीडिया चैनल की एंकर ने झोलाछाप डॉक्टर कह दिया है. इस बयान के बाद अब फार्मासिस्ट एसोसिएशन के सदस्य गुस्से में आ गए हैं. फार्मासिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि अगर डॉक्टर मरीज के लिए दवाईयां लिख रहे हैं तो उन दवाईयों की देखरेख की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट पर होती है.

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अगर एक फार्मासिस्ट अपना कर्तव्य समय पर पूरा न करे तो मरीज की जान आफत में पड़ सकती है. ऐसे महत्वपूर्ण और दायित्व वाले कार्य को झोलाछाप कहकर संबोधित करना सभी फार्मासिस्टों का सम्मान न करने के बराबर है. इस बयान के बाद देशभर के फार्मासिस्ट में रोष भर गया है.

इस संबंध में हमने बात की कृष्णा से. उन्होंने बताया कि आज के समय में सभी डॉक्टर को फ्रंटलाइन वॉरियर कह रहे हैं. मगर सिर्फ डॉक्टर ही अस्पताल में काम नहीं करता. उनके साथ कई अन्य विभाग के लोग मिलकर अस्पताल में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं. फार्मासिस्ट भी उन्हीं में से एक है. आज के समय में दवाईयों की आपूर्ति करने की बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी फार्मासिस्टों पर है.

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इसमें जरा देरी भी संभव नहीं है. ऐसे पेशेवर और डिग्री होल्डर फार्मासिस्टों को झोलाछाप कहना बहुत शर्म की बात है. फार्मासिस्ट बनने के लिए भी पूरी पढ़ाई करनी होती है. हर साल देश से लगभग 55 हजार छात्र फार्मा संबंधित कोर्स करते हैं. और नेशनल मीडिया पर उन फार्मासिस्ट को झोलाछाप का तमगा देना शर्मनाक है. उन्हें अपने शब्दों के लिए समस्त फार्मासिस्टों से माफी मांगनी चाहिए.

मरीज को ठीक करने की होती है जिम्मेदारी

बता दें की फार्मासिस्ट द्वारा उपलब्ध कराई गई दवाओं से ही मरीज का स्वास्थ्य ठीक होता है. फार्मासिस्ट का काम होता है कि डॉक्टरों द्वारा प्रेस्क्राइब की गई दवा को उपलब्ध कराया जाए. इस दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी होती है. अगर दवाई नहीं हैं तो ऐसे स्थिति में उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन्हें समय पर मंगाना भी फार्मासिस्ट का काम होता है.

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