बसंत पंचमी पर बनेंगे खास योग

नई दिल्ली. बसंत पंचमी का त्योहार आने वाला है. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है. इस खास दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. इस बार पंचांग के मुताबिक बसंत पंचमी 16 फरवरी को पड़ने वाली है. ये दिन माघ माघ सी शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर है. माघ शुक्ल की पंचमी को ही बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है.

मां सरस्वती की पूजा का है विधान

इस दिन मां विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. शास्त्रों में भी इस दिन को खास बताया गया है. हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा गया है. ज्ञान में हर तरह के प्रकाश को दूर करने की क्षमता होती है. इस दिन कई तरह के शुभ कार्य किए जाते हैं. किसी भी नई शुरुआत करने के लिए इस दिन को खास महत्व बताया गया है.

इस बार हैं ये शुभ योग

इस बार बसंत पंचमी के मौके पर खास संयोग भी बन रहे हैं. इस साल बसंत पंचमी पर दो योग बन रहे हैं. इस दिन ग्रह भी उत्तम स्थिति में रहने वाले है. पंचांग के मुताबिक इस दिन अमृत सिद्धि योग बन रहा है. इसके अलावा रवि योग भी बन रहा है. इस दिन इन दोनों योग बनने से बसंत पंचमी का महत्व अधिक बढ़ता है. पंचमी के मौके पर रेवती नक्षत्र रहेगा. इसे बुध नक्षत्र भी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्रों में बुध ग्रह को बुद्धि और ज्ञान के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

पंचमी पर है पीले रंग का महत्व

पंचमी के मौके पर पीले रंग का भी विशेष महत्व होता है. पीले रंग को उत्साह और उल्लास का रंग माना जाता है. बसंत ऋतु को सभी ऋतुओं में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. ये सभी ऋतुओं में विशेष है. हिंदू शास्त्रों में कहा जाता है कि बसंत ऋतु में धरती की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होती है. इस समय खेतों में सरसों की फसल लहराने लगती है. ऐसे में धरती भी पीली नजर आने लगती है. इससे आंखों को भी आनंद मिलता है.

बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. ये प्रकृति का उत्सव है. इस दिन पीले रंग का भी अधिक महत्व होता है. पीले रंग के इस्तेमाल से दिमाग अधिक सक्रिय होता है. इस दिन पीले रंग का खास महत्व होता है. पीले रंग पहनना, पीले फूलों को मां सरस्वती को अर्पित करना भी शुभ माना जाता है.

ये है शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी इस बार सुबह 3 बजकर 36 मिनट से शुरु होगी. ये तिथि 17 फरवरी को पंचमी तिथि के साथ समाप्त होगी. साधकों को ध्यान रखना चाहिए कि मां सरस्वती की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाए. ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा भी मिलती है. मां सरस्वती की पूजा करने के साथ ही उन्हें वाद्य यंत्र और पुस्तकें भी अर्पित करनी चाहिए.

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