बुजुर्गों में बढ़ रहा साइकेट्रिक इलनेस का खतरा, कोरोना संक्रमण है कारण

नई दिल्ली. कोरोना वायरस का खतरा साल भर बाद भी खत्म नहीं हुआ है. लाखों लोगों की जान कोरोना के कारण जा चुकी है. कोरोना का कहर अब भी थमता नहीं दिख रहा. आलम ये है कि देश में रोजाना लाखों नए मामले सामने आ रहे हैं. हालांकि राहत की बात है कि कोरोड़ों लोगों की जान इस कोरोना वायरस से बच गई है. कोरोना संक्रमण से लोगों की जान जरूर बच गई हो मगर इसके कई दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं.

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हाल ही में दक्षिण कोरिया में एक रिसर्च हुई है. इस रिसर्च में सामने आया कि 10 कोरोना वायरस रोगियों में से नौ बीमारी से उबरने के बाद थकान, मनौवैज्ञानिक परिणाम और गंध व स्वाद महसूस नहीं होती है. ये सभी कोरोना वायरस के साइड इफैक्ट है. कोरोना वायरस के सिर्फ यही साइड इफैक्ट नहीं है. इसके अलावा रिसर्च में सामने आया है कि एक उम्र के मरीजों में साइकेट्रिक इलनेस भी देखने को मिलती है.

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डॉक्टर्स का कहना है कि दिक्कत इस बात कि है कि जो बुजुर्ग कोरोना संक्रमण को हरा देते हैं वो दूसरी बीमारी से ग्रस्त हो जाते है. इसमें साइकेट्रिक इलनेस भी शामिल है. इस बीमारी का कोई इलाज नहीं होता है. अगर मरीज एक बार इस बीमारी की चपेट में आ जाए तो इससे बचाव मुमकिन नहीं होता है. इसलिए ये बहुत गंभीर है.

दरअसल कई बार कोरोना के इलाज के दौरान मरीज को एस्टीरॉइड दी जाती है. ये तब होता है जब मरीज की बीमारी सीरियस स्टेज पर होती है. ऐसे मरीजों को ठीक होने के बाद कई गंभीर समस्याओं को सामना करना पड़ सकता है. इसमें साइकैट्रिक इलनेस भी शामिल है. ऐसे में डॉक्टर सलाह देते हैं कि बिना डॉक्टर के प्रिसक्रिपशन के एस्टीरॉयड का सेवन नहीं करना चाहिए.

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इस संबंध में The Depth ने बात की कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. मोहित शर्मा से. उन्होंने बताया कि कोरोना सिर्फ एक बार की बीमारी नहीं है. इसके कई दुरगामी परिणाम भी होते हैं. कोरोना से ठीक गुए मरीज को महीनों तक अपनी देखभाल करने की जरूरत होती है. जरा सी लापरवाही भी मरीज की जान को जोखिम में डाल सकती है.

बुजुर्गों पर हो रहा अधिक वार

डॉ. मोहित ने बताया कि कोरोना संक्रमण को हराकर जो मरीज ठीक हो रहे हैं उन्हें कई दूसरी परेशानियां हो रही है. ऐसे में बुजुर्ग वर्ग पर कई तरह का खतरा मंडरा रहा है. उनमें साइकैट्रिक इलनेस का जोखिम बढ़ रहा है. ऐसे में कोरोना संक्रमण के बाद मरीजों को सेहत का अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता होती है. इतना ही नहीं उन्हें समय समय पर स्वास्थ्य जांच भी करानी चाहिए.

क्या है साइकैट्रिक इलनेस

साइकेट्रिक इलनेस दरअसल मानसिक परेशानी होती है. इसमें डिप्रेशन, एन्जाइटी, मेमोरी लॉस जैसी समस्याएं मरीज को हो सकती है. भारत में ये सबसे कॉमन मानसिक परेशानियां है. इनसे बचने के लिए जरूरी है कि मरीज अपना पूरा ध्यान रखे. कोरोना से ठीक होने के बाद भी लगातार दवाई खाते रहें. डॉक्टर की जानकारी के बिना किसी दवाई का सेवन खुद से न करें. ये सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है.

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