फीस एक्ट 2016 को लेकर भ्रामक प्रचार कर रहें हैं अधिकारी और स्कूल संचालकः संघ

 जयपुर. कोरोना काल मे फीस को लेकर चल रहा फसाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 15 छूट के साथ फीस एक्ट 2016 को सही मानते हुए फीस वसूलने के आदेश दिए। तो वहीं दूसरी तरफ अब अधिकारी गलत बयानबाजी कर प्रदेश के अभिभावकों को गुमराह करने का काम कर रहे है। यह आरोप बुधवार को संयुक्त अभिभावक संघ ने लगाया। संघ ने कहा कि अधिकारी लगातार कोर्ट की अवमानना करते आ रहे हैं। पूर्व में राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ का आदेश हो या डिवीजन बैंच के आदेश हों, दोनों जगहों पर अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों की अवमानना की है और कोर्ट के आदेश के विरुद्ध जाकर निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाया है।

संघ महामंत्री संजय गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में भी निजी स्कूलों ने राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतरीम आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए प्रदेश के अभिभावकों को प्रताड़ित किया, जिसकी शिकायत करने के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कार्यवाही नहीं। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल आदेश दे दिया है तो शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए सुप्रीम के आदेश के विरुद्ध जाकर बयानबाजी कर रहे हैं और फीस एक्ट को लेकर भ्रामक प्रचार कर रहे हैं जो बन्द होना चाहिए।

प्रदेश एक्जीक्यूटिव मेंबर युवराज हसीजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग के निर्देशक सौरभ स्वामी अलग-अलग बयान बाजी कर रहे हैं। एक मीडिया नेटवर्क को अपने इंटरव्यू में बता रहे हैं कि वह फीस एक्ट की पालन सुनिश्चित करवाएंगे। अधिकारियों को निर्देश देंगे और वहीं दूसरी तरफ दूसरे मीडिया नेटवर्क में वह बयान दे रहे हैं कि सत्र 2019 की फीस 2016 फीस एक्ट के अनुसार ही ली जा रही है। जबकि एक्ट के अनुसार सभी स्कूलों में पीटीए का गठन होगा, उसके बाद एसएलएफसी बनेगी वह स्कूलों की फीस निर्धारित करेगी।

जबकि जबसे फीस एक्ट लागू हुआ है तब से अब तक किसी भी स्कूल में ना पीटीए का गठन हुआ ना एसएलएफसी का गठन हुआ है। ऐसे में फीस कैसे और किसने निर्धारित की, किस आधार शिक्षा निर्देशक सौरभ स्वामी 2019 की फीस को एक्ट के अनुसार मानकर मोहर लगा रहे हैं। जब तक स्कूल संचालक सत्र 2019 की फीस के साक्ष्य अभिभावकों को नही दिखाएंगे अभिभावक फीस जमा नही करवाएंगे।

संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना सभी निजी स्कूलों में सुनिश्चित करवायें। कोर्ट ने सोमवार को फीस एक्ट को सही मानते हुए एक्ट के निर्धारित उपबंधों के अनुसार 2019-20 की तय फीस में से 15 प्रतिशत कम कर फीस प्राप्त करने के आदेश दिए है्ं। अब सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है वह प्रदेश के सभी स्कूलों में एक्ट की पालना सुनिश्चित करवाये। अगर एक्ट की पालना नहीं करवाई गई तो स्कूल दर स्कूल राज्यस्तरीय आंदोलन संयुक्त अभिभावक संघ आयोजित करेगा। तब तक फीस भी जमा नहीं करवाई जाएगी जिसका अधिकार सुप्रीम कोर्ट भी देता है।

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