मैटर्निटी लीव हुई कैंसिल, बढ़ा बोझ

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल में फ्रंटलाइन में खड़े होकर डॉक्टर, नर्स व अन्य मेडिकल स्टाफ अस्पतालों में मोर्चा संभाले हुए है. इसी बीच नई जानकारी सामने आई है जिसने होश उड़ा दिए है. दरअसल नेशनल बोर्ड ऑफ एजुकेशन यानी एनबीई ने डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) छात्रों की मेटर्निटी लीव को कैंसिल कर दिया है.

मरीज की जान से नहीं होने देंगे खिलवाड़, नर्सों ने आउटसोर्स के खिलाफ उठाई आवाज

इस आदेश के बाद डीएनबी छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. देशभर की छात्राओं को मैटर्निटी लीव न दिए जाने के आदेश के बाद परेशानी काफी बढ़ गई है. दरअसल छात्राओं का कहना है कि नेशनल बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने नया नियम निकाला है. इस आधार पर अब किसी भी छात्रा को मैटर्निटी लीव नहीं दी जाएगी. इस आदेश के देशभर में सैंकड़ों छात्राएं प्रभावित हुई है.

कोरोना के बीच आउटसोर्सिंग पर नर्सों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी

अगर किसी छात्रा को लीव चाहिए तो उन्हें लीव खत्म होने के बाद आगे एक्सटेंशन के जरिए अपनी ड्यूटी को पूरा करना होगा. इस ड्यूटी को करने के लिए छात्राओं को किसी तरह की राशि का भुगतान भी नहीं किया जाएगा. इस आदेश के बाद से डीएनबी कर रही महिलाएं असमंजस की स्थिति में पड़ चुकी है.

नहीं खत्म हो रही परेशानी, अब नर्सों ने की हड़ताल

सूत्रों की मानें तो नेशनल बोर्ड के इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में केस डाला गया मगर इस केस पर जल्दी सुनवाई नहीं हो रही है. इतना ही नहीं जल्दी सुनवाई के लिए डाले गए केस को कोर्ट ने पूरी तरह से रिजेक्ट भी कर दिया. इसके बाद से महिलाओं को किसी तरह की सुविधा नहीं मिल रही है. गौरतलब है कि मां बनना हर महिला के लिए बहुत खास होता है. मगर ऐसे महत्वपूर्ण समय में महिलाओं का साथ देने की जगह बोर्ड ने महिलाओं की परेशानी को बढ़ाने का काम किया है जिससे महिलाएं बहुत आहत है.

राजस्थान में डॉक्टर के बाद नर्स हड़ताल पर

डीएनबी छात्राओं का कहना है कि बोर्ड को इस संबंध में कई मेल और फोन किए गए मगर उनका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है. बोर्ड के इस रवैये से कई महिलाएं वर्तमान समय में भी परेशानी झेल रही है. जानकारी के मुताबिक कई अस्पताल महिलाओं को मैटर्निटी लीव देने के इच्छुक है मगर बोर्ड के नियमों से बंधे होने के कारण छुट्टियां नहीं दी जा रही है.

नियमित हो शिक्षकों की भर्ती : योगेश जांगिड़

महाराष्ट्र की एक अन्य डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोरोना काल के दौरान डॉक्टरों ने कोवि ड्यूटी की. कई प्रेगनेंट डॉक्टर भी कोविड ड्यूटी देती रही. मगर अब एनबीई ने मैटरनिटी लीव देने से इंकार कर दिया है. ये हेल्थ केयर वर्कर्स के साथ अच्छा व्यवहार नहीं है. जो हेल्थ केयर वर्कर अपनी जान, अपने छोटे बच्चे की जान की परवाह किए बिना ड्यूटी कर रहे है उन्हें छुट्टी न देने का आदेश अन्याय से कम नहीं है. यहां तक कि तीन महीने का एक्सटेंशन दिए जाने के लिए भी जोर दिया जा रहा है. बोर्ड द्वारा दिया गया ये आदेश बहुत निराशाजनक और हैरान करने वाला है.

मिल रहा साथ

ट्वीटर पर एनबीई के इस आदेश के विरोध में डॉक्टर एसोसिएशन भी उतर आए है. इसी कड़ी में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन दिया है. इसी कड़ी में आगामी 25 जून की शाम पांच बजे ट्वीटर पर आंदोलन भी चलाया जाएगा.

मैटर्निटी एक्ट के ये हैं फायदे

इस एक्ट के तहत महिला कर्मचारियों को रोजगार की गारंटी मिलने के साथ ही उन्हें मेटर्निटी बेनिफिट का अधिकारी भी बनाता है. इस एक्ट के तहत छुट्टी लेने वाली महिलाओं को पूरी सैलरी दी जाती है. ये कानून सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं पर लागू होता है, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत है.

सफदरजंग अस्पताल में खत्म हुई Amphotericin B, इलाज के लिए जूझ रहे मरीज

सरकार ने इस एक्ट में महिलाओं को 26 हफ्ते की छुट्टी का प्रावधान दिया है. महिलाएं डिलीवरी के आठ हफ्ते पहले से छुट्टी ले सकती है. बता दें कि 26 मैटर्निटी लीव पहले और दूसरे बच्चे में दी जाती है. जबकि तीसरा बच्चा होने की सूरत में 12 हफ्तों की मैटर्निटी लीव का प्रावधान है.

कोरोना की तीसरी वेव के लिए ऐसे निपटने की तैयारी

अगर किसी बच्चे की उम्र तीन महीने से कम है और उसे महिला ने गोद लिया है तो ऐसी महिलाओं को भी 12 हफ्तों की छुट्टी दी जाती है. इस छुट्टी को लेने के लिए महिला को संबंधित संस्थान में बीते 12 महिनों में कम से कम 80 दिनों की उपस्थिति लगाना अनिवार्य होता है. वहीं अगर कोई संस्था इन नियमों का पालन नहीं करती है तो सजा का प्रावधान भी किया गया है.

The Depth

TheDepth is India's own unbiased digital news website.

One thought on “मैटर्निटी लीव हुई कैंसिल, बढ़ा बोझ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: