न्यायाधीशों व अधिकारियों के लिए प्रमोशन में हो रिजर्वेशन, SC कमीशन का पंजाब सरकार को आदेश

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब की सरकार को निर्देश दिए है कि वो न्यायालयों में न्यायाधिशों, न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण की सुविधा दे। पंजाब सरकार द्वारा आरक्षण की नीति को पूर्ण रुप से लागू न किए जाने को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने नाराजगई जताई है।

इस संबंध में बृहस्पतिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने कहा कि पंजाब सरकार के गृह विभाग को तुरंत आरक्षण नियमों को लागू करने के निर्देश दिए गए है। आरक्षण नियमों के मुताबिक पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

अध्यक्ष ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा की गई इस अनदेखी के संबंध में आयोग ने आगामी दो सप्ताह में संबंधित अधिकारियों को एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। पंजाब हाईकोर्ट न्यायालय में न्यायाधियों व अन्य कर्मचारियों के साथ इस तरह का अन्याय होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ये संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।

2006 में बना है एक्ट

इस संबंध में पंजाब सरकार ने 2006 में एससी व ओबीसी सेवाएं और आरक्षण एक्ट का निर्माण किया था। इस एक्ट के जरिए एससी समुदाय के लोगों को 14% रिजर्वेशन की सुविधा दिए जाने का प्रावधान है। वहीं ग्रुप सी औ डी के कर्मचारियों को 20% रिजर्वेशन दिया जाता है।

ये है मामला

बता दें कि न्यायालयों में रिजर्वेशन को लेकर 8 अप्रैल 2021 को प्रार्थी ने आयोग को शिकायत की थी। इस शिकायत में कहा गया कि पंजाब की अदालतों में अनुसूचित जाति के जजों / अधिकारियों को पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। आयोग ने मामले की चार बार सुनवाई की है।

वहीं अंतिम सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की विशेष सचिव बलदीप कौर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल संजीव बेरी, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी अंजू राठी राणा मौजूद रहे।

बिहार में आदेश हो चुका है लागू

बता दें कि इससे पहले ‘बिहार सरकार व अन्य बनाम बाल मुकंद साहा व अन्य (2000)’ केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बिहार राज्य की न्यायपालिका में कार्यरत न्यायाधीश या अधिकारी भी राज्य सरकार के ‘इस्टैब्लिशमेंट’ कैटेगरी में आते हैं। इसी प्रकार पंजाब के विभिन्न अदालतों में न्यायाधीश/अधिकारियों की नियुक्ति भी राज्य सरकार की ‘इस्टैब्लिशमेंट’ श्रेणी में मानी जानी चाहिए। इसलिए ये सभी आरक्षण लाभ के हकदार हैं।

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