कोरोना संक्रमण से 850 से अधिक डॉक्टरों ने गंवाई जान

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल में मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. कोरोना से मरने वालों में सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि कई डॉक्टर्स भी शामिल हैं. दुर्भाग्य है कि देशभर में कई डॉक्टर्स कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. इन दिनों कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ को ही है क्योंकि वो ही मरीजों के सबसे अधिक पास रहते हैं और उन्हें इलाज देते हैं.

बिहार में बुरा हाल

बिहार में इस समय कोरोना संक्रमण की दूसरी वेव के कारण हाल बहुत बुरा है. कोरोना काल में एक ओर जहां डॉक्टर दिन रात ड्यूटी कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर उनकी खुद की जान पर भी पूरा रिस्क बना हुआ है. इसी रिस्क में कोरोना की दूसरी वेव के दौरान बिहार में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 58 पर पहुंच चुकी है. ये आंकड़ा सिर्फ बिहार राज्य का है.

इसमें एम्स पटना समेत कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टर शामिल हैं. इसमें पीएमसीएच, नालंदा के अलावा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके डॉ. रामजन्म सिंह का भी कोरोना संक्रमण से निधन हो चुका है. मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर खुद भी इस बीमारी से जूझ रहे हैं.

देशभर में सैंकड़ों डॉक्टरों ने गंवाई जान

कोरोना संक्रमण के असर से सिर्फ जनता ही नहीं बल्कि डॉक्टरों की जान भी जा रही है. जानकारी के मुताबिक अगर बिहार की बात करें तो यहां पहली वेव में कुल 25 डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमण से अपनी जान गंवाई थी. आंकड़ों के मुताबिक वहीं कोरोना की पहली वेव में देशभर में 748 डॉक्टरों की जान गई थी. इस समय जारी दूसरी वेव में भी 138 डॉक्टरों की जान जा चुकी है.

बिहार सरकार ने की घोषणा

बिहार सरकार ने अपने राज्य के डॉक्टरों के लिए कुछ घोषणाएं भी की है. इसमें एमबीबीएस डॉक्टर को प्रतिदिन 3000 रुपये और पीजी या विशेषज्ञ डॉक्टर को 7000 रुपये का भुगतान किया जाएगा. इसी के साथ डॉक्टरों को एक महीने का अतिरिक्त वेतन भुगतान भी होगा. वहीं कोविड से मरने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के परिवार वालों को नौकरी या धनराशि दिए जाने की घोषणा भी की गई है.

एम्स के डॉक्टरों की नहीं सरकार को चिंता

वहीं एम्स पटना के डॉक्टरों की चिंता सरकार को नहीं है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार सरकार या बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने अबतक एम्स पटना में कार्यरत डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ के लिए किसी तरह की कोई घोषणा नहीं की है. बीते साल भी इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई थी. दरअसल एम्स पटना में सभी विशिष्ठ व्यक्तियों और गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है. ऐसे में डॉक्टर अपनी जान दांव पर लगाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं.

इसके बाद भी सरकार ने एम्स पटना के डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ के लिए किसी तरह की कोई सुविधा का इंतजाम नहीं किया है. इस संबंध में यूनाइटेड रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि डॉक्टरों में डर है कि अगर उन्हें कुछ हो जाए तो उनके परिवार की देखरेख करने के लिए भी सरकार कुछ कदम उठाने को तैयार नहीं है. अगर डॉक्टरों को मानसिक रुप से भरोसा हो तो अधिक तन्मयता के साथ वो मरीजों इलाज कर सकेंगे.

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