कोरोना संक्रमण से हुई 1600 शिक्षकों की मौत

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर पहली की अपेक्षा काफी अधिक घातक साबित हुई है. इसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से पूरे 1600 शिक्षकों की जान जा चुकी है. इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा है.

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इस पत्र के संबंध में संघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि हमने कोरोना से जान गंवा चुके शिक्षकों के लिए आवाज उठाई है. साथ ही शिक्षकों के साथ हो रहे व्यवहार को गलत ठहराया है. संघ के मुताबिक कोरोना संक्रमण काल में भी शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों, काउंटिंग केंद्रों आदि पर लगाई गई. इस दौरान जुटी भारी भीड़ के कारण कई शिक्षक कोरोना संक्रमण का शिकार हुए. शिक्षकों की जान तक चली गई.

वेतन कटौती पर उतारू

शिक्षकों का कहना है कि चुनाव ड्यूटी लगाने से पहले प्रशासन आश्वासन दिया था कि बीमार शिक्षकों और कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी. इसके बाद भी कई शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई. बीमारी की हालत में अनुपस्थित होने के कारण अब शिक्षकों की जबरन वेतन कटौती की जा रही है.

दो शब्द कहने का समय नहीं

सरकार के आदेशों का पालन करते हुए अपनी जान गंवाने वाले शिक्षकों के लिए अबतक किसी बेसिक शिक्षा अधिकारी या प्रशासन ने संवेदना के दो शब्द भी नहीं कहे हैं. जिन शिक्षकों ने अपने वेतन से 76 करोड़ रुपये आर्थिक सहायता के तौर पर मुख्यमंत्री कोष में जमा कराए थे उन्हीं शिक्षकों को श्रद्धांजलि देने के लिए आज मुख्यमंत्री के पास समय नहीं है.

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संघ ने मांग की है कि कोरोना से जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए. मृतक शिक्षकों के परिवार को 1 अप्रैल 2005 से पूर्व लागू पूरानी पेंशन स्कीम के तहत पेंशन की सुविधा दी जाए. जिन मृतकों के आश्रित नौकरी लेने के योग्य हों उन्हें नौकरी देकर नियुक्त किया जाए. वहीं ऐसे मृतक जो 60 वर्ष से कम आयु के थे उनके परिवार को ग्रेच्युटी की धनराशि भी दी जाए.

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राज्य में जो भी शिक्षक कोरोना संक्रमित है सभी को कोरोना वॉरियर घोषित किया जाए. जिन शिक्षकों कोरोना का इलाज चल रहा है उन्हें इलाज का संपूर्ण खर्चा भुगतान किया जाए. वहीं चुनाव के दौरान जो शिक्षक बीमारी के कारण ड्यूटी नहीं दे सके उनके खिलाफ की जा रही प्रशासनिक कार्यवाही को निरस्त किया जाए. शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न करवाया जाए.

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