कोरोना में ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षक परेशान, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण दिल्ली सरकार ने वैसे तो लॉकडाउन लगाया हुआ है. मगर इस लॉकडाउन का लाभ दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों को नहीं मिल रहा. शिक्षकों की लगातार कोरोना में ड्यूटी लगाई जा रही है. ऐसे में शिक्षकों को अपनी जान की फ्रिक सता रही है.

दरअसल दिल्ली की तीनों नगर निगम में शिक्षकों को बीते साल भर से कोरोना में ड्यूटी करनी पड़ रही है. दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विभाग के एक्ट के मुताबिक शिक्षकों को ड्यूटी करनी पड़ रही है. मगर हैरानी की बात है कि शिक्षकों को अमानवीय व्यवहार से दो चार होना पड़ रहा है. लंबे अर्से से निगम के शिक्षक बिना किसी अवकाश के 12-12 घंटों तक ड्यूटी करने को मजबूर है.

शिक्षकों द्वारा की जा रही इस ड्यूटी के कारण उनके परिवार के लोग भी मानसिक परेशानी झेलने को मजबूर है. इस संबंध में नगर निगम शिक्षक संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी ने डीडीएमए चीफ, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मुख्य सचिव, तीनों नगर निगमों के महापौर व तीनों निगम आयुक्त को पत्र लिखा है. इस पत्र के जरिए शिक्षकों ने मांग की है कि इनके व अन्य कर्मचारी जो डीडीएमए के आदेश मुताबिक लंबे समय से ड्यूटी दे रहे हैं उन्हें रोटेशन प्रणाली के तहत आराम दिया जाए.

संघ की मांग है कि शिक्षकों को तुरंत रिलीव किया जाए. इसकी जगह दिल्ली सरकार व अन्य निगम कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाए जिससे शिक्षकों को आराम मिल सके. कोरोना ड्यूटी में 50 से अधिक उम्र के लोग भी लगाया जा रहा है. सरकार को इन लोगों को राहत देनी चाहिए. अधिक उम्र वालों को कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा है.

रिजर्व रखे जाएं बेड

वहीं कोरोना में ड्यूटी के दौरान अगर कोई शिक्षक या निगम कर्मी संक्रमित होता है तो उसका इलाज दिल्ली सरकार के अस्पताल में हो व उनके लिए बेड भी रिजर्व रखे जाएं. कोरोना संक्रमण का खतरा देखते हुए भी निगम कर्मी लगातार काम कर रहे हैं. ऐसे में सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि पॉजिटिव होने की सूरत में उन्हें इलाज के लिए दर दर की ठोकरें न खानी पड़े. ऐसे में वो मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न न हो.

इस संबंध में संघ के प्रभारी महिपाल मावी ने बताया कि डीडीएमए एक्ट ड्यूटी जैसे स्कूलों में बना भोजन बांटने व अन्य कार्यों में ड्यूटी लगाने पर पीपीई सुरक्षा किट भी मुहैया कराई जाए. अगर शिक्षकों को सुरक्षा किट नहीं दी गई तो वो ड्यूटी का बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे.

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