उत्तरी निगम में एप से भेजनी होगी अटेंडेंस, शिक्षकों में गुस्सा

नई दिल्ली. दिल्ली नगर निगम काम से अधिक कर्मचारियों के साथ अपने रिश्तों को लेकर चर्चा में रहता है. कभी निगम के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर उतर आते हैं तो कभी निगम के अन्य कर्मचारी किसी कारणवश आंदोलनरत हो जाते हैं. इन दिनों उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों के बीच ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है.

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षक पहले वेतन जारी किए जाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. इसी के साथ एक नई परेशानी उनके सामने खड़ी हो गई है. दरअसल शिक्षकों का कहना है कि निगम ने नया फरमान जारी किया है. इसके मुताबिक निगम के शिक्षकों व अन्य कर्मियों को अपनी उपस्थिति मार्क करने के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल करना होगा. उपस्थिति के साथ ही कर्मचारियों को अपनी लोकेशन भी शेयर करनी होगी. खासतौर से महिलाओं के लिए ऐसा करना खतरे से खाली नहीं होगा.

शिक्षकों का कहना है कि इस तरह के नियम लाकर निगम मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए जबरदस्ती मजबूर कर रहा है. ऐसा करना निजता के अधिकार का हनन करना है. ऐसे किसी भी एप पर भरोसा करना सही नहीं होगा. कर्मचारियों की जानकारी इस एप से लीक भी हो सकती है. इससे निजी जानकारी असामाजिक हाथों में जाने या फोन डेटा लीक होने की संभावना बढ़ जाएगी.

नगर निगम शिक्षक संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी ने कहा कि किसी भी विभाग में उपस्थिति मार्क करवाना उस विभाग की जिम्मेदारी होती है चाहे ऑनलाइन हो ऑफलाइन हो या डिवाइस द्वारा हो, विभाग इसके लिए अपने कर्मी को उसके निजी डिवाइस द्वारा एप्प डाउन लोड कर उपस्थिति मार्क करने पर बाध्य नहीं कर सकता.

उन्होंने आगे कहा कि विभाग के इस तुगलकी फरमान पर तुरंत रोक लगनी चाहिए. शिक्षकों व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को इस तरह फोन में एप डाउनलोड करने व खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए.

वहीं इस मामले पर नगर निगम शिक्षक संघ के प्रभारी महिपाल मावी ने बताया कि विभाग अगर ऑनलाइन कर्मी के फोन से एप्प डाउन लोड लोड करवाना चाहता है तो इसके लिए पहले विभाग कर्मी को नि:शुल्क फोन,डिवाइस उपलब्ध करवाए और उसके बाद सभी शिक्षक विभाग के इस आदेश का पालन करेंगे.

मेयर से मिला आश्वासन

शिक्षकों ने इस आदेश को वापस लेने की मांग के साथ निगम के मेयर से भी मुलाकात की. हालांकि निगम के मेयर ने शिक्षकों को आश्वासन दिया की ये आदेश तबतक लागू नहीं होगा जबतक शिक्षकों को फोन न उपलब्ध कराए जाए.

महीनों से नहीं मिला वेतन

निगम शिक्षकों का कहना है कि कई महीनों से शिक्षक वेतन मिलने की आस लिए बैठे हैं. समय पर वेतन न मिलने के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड रहा है. वहीं निगम शिक्षकों की परेशानियों को लगातार नजरअंदाज किए हुए है.

न्यायालय का रुख कर सकते हैं शिक्षक

शिक्षकों ने कहा कि अगर निगम इस आदेश को वापस नहीं लेता है तो शिक्षक संघ को न्यायायल की शरण में जाना पड़ेगा. इससे पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के शिक्षक भी इस जबरदस्ती के कार्य के विरोध में शिक्षकों व चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है.

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