जानें कौन से मरीज को घर पर रहकर करना है इलाज, किस स्थिति करना है अस्पताल का रुख

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के मामले दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं. अस्पतालों में बेड की कमी और ऑक्सीजन की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है. बढ़ते मामलों के कारण लोगों में घबराहट का माहौल बना हुआ है. कोरोना संक्रमित अधिकतर लोगों होम आइसोलेशन में भी ठीक हो सकते हैं. वहीं एक तरफ जब कोरोना संक्रमितों की संख्या में बेहताशा इजाफा हो रहा है तो अस्पतालों पर भी मरीजों का दबाव बढ़ रहा है.

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ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि इस बात पर ध्यान दिया जाए कि कोरोना संक्रमित हर मरीज को अस्पताल में जाना जरूरी नहीं है. मरीज की घर पर रहकर भी देखभाल की जा सकती है. इस संबंध में हमने बात की नई दिल्ली के एसडीएम और डॉक्टर नितिन शाक्या से.

लक्षण देख करें तय

कोरोना मरीजों में दो तरह के लक्षण दिखते हैं एक एसिम्प्टोमैटिक और दूसरा सिम्प्टोमैटिक. एसिम्प्टोमैटिक मरीज वो होते हैं जो कोरोना संक्रमित होते हैं मगर उनमें कोरोना का काई लक्षण नजर नहीं आता. ऐसे मरीजों को अस्पताल में एडमिट होने की जरुरत नहीं होती है. ऐसे मरीजों का इलाज घर पर होम आइसोलेशन में भी किया जा सकता है. होम आइसोलेशन में इलाज करने वाले मरीजों को जरुरत है कि वो समय समय पर डॉक्टर के साथ टेली संकल्टेशन लेते रहें.

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वहीं जो सिप्टोमैटिक मरीज हैं यानी जिन्हें कोरोना के लक्षण दिखते हैं जैसे खांसी, बुखार, जुकाम, लूज मोशन, शरीर में रैशेज आदि. ऐसे मरीजों को सिप्टोमैटिक ट्रीटमेंट दिया जाता है. ऐसे मरीजों के पास पल्स ऑक्सीमीटर होना चाहिए. इसके जरिए इनके वाइटल्स को मॉनिटर किया जा सकता है और इसकी रिपोर्ट भी बनाई जा सकती है. ऐसे मरीजों में ये देखना जरूरी होता है कि उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट कितना है. अगर मरीज का सैचुरेशन 94 से ऊपर है तो ऐसी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं होती.

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वहीं अगर मरीज में ये लेवल 90-94 तक पहुंचता है तो डॉक्टर से फोन के जरिए कॉन्टेक्ट कर इसे मैनेज किया जा सकता है. आनलाइन ही डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं कि ऑक्सीजन किस तरह से देना है. मरीजों का इस तरह घर पर रहकर इलाज करना बहुत फायदेमंद है. इससे मरीज के परिवार वालों को वायरस का खतरा नहीं होगा और अस्तपालों पर भी दबाव कम पड़ेगा.

नॉन आईसीयू अस्पताल में हो सकते हैं एडमिट

ऐसे मरीज जिनका सैचुरेशन लेवल 85-90 तक पहुंच गया है उन्हें नॉन आईसीयू अस्पतालों में भर्ती करवाया जा सकता है. बता दें की नॉन आईसीयू अस्पताल वो अस्पताल हैं जहां आईसीयू वॉर्ड की सुविधा नहीं होती. मगर इन अस्पतालों में मरीज को ऑक्सीजन दिए जाने की सुविधा होती है. ऐसे में मरीजों को कोविड केयर में भी भर्ती करवाया जा सकता है. मरीज को आईसीयू में सिर्फ तब भर्ती करवाएं जब उनका सैचुरेशन लेवल 85 से नीचे पहुंचने लगे.

मरीजों को है समझने की जरुरत

इस समय लोगों को समझने की जरुरत है कि मरीजों को उनके लक्षणों के आधार पर बांटा जाए. जिन मरीजों में ऑक्सीजन का लेवल 90 से ऊपर है उनका इलाज घर पर रहते हुए किया जाए. हालांकि इस दौरान डॉक्टर के साथ कंसल्टेशन भी जारी रखें. वहीं जिन मरीजों में 85-90 के बीच सैचुरेशन है उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत होती है. सिर्फ 85 से कम लेवल के मरीजों को आईसीयू में शिफ्ट करना होता है.

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डॉक्टर का कहना है कि अगर मरीज के परिजनों में घबराहट का माहौल कम होगा तो जरुरतमंद मरीजों को अधिक सुविधाएं दी जा सकेंगी. इसी के साथ मरीज ध्यान रखें की समय पर सिर्फ डॉक्टर द्वारा दी गई दवाईयां लें. जिंक सप्लीमेंट, विटामिन के सप्लिमेंट समय समय पर लेते रहें. फ्रूट्स खाएं और अपनी डाइट का जरुर ख्याल रखें. इसी के साथ खुद को खुश और शांत भी बनाए रखें.

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