किन्नरों की जान की नहीं कोई कीमत? वैक्सीन का इंतजार

नई दिल्ली. हमारे समाज में किन्नर एक ऐसा समुदाय है जिनका कहीं जिक्र नहीं होता. इन्हें कभी दबाया नहीं गया क्योकिं इन्हें कभी समाज का हिस्सा ही नहीं माना गया. यही कारण है की आज जब देश भर में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है, दवाईयों का वितरण हो रहा है तो इस समुदाय का जिक्र भी होता नहीं दिखता. आज भी समाज हाशिये पर बना हुआ है.

खुशियों के मौके पर जिन किन्नरों की राह देखी जाती है आज वो खुद सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मुंह ताक रहे है. अनंत काल से इस समाज का अस्तित्व है मगर ये समस्याओं से घिरे हुए है. ये हमेशा से तिरस्कृत और उपहासपूर्व रहे है. आज भी ये समुदाय अपनी सांसों के लिए जद्दोजहद कर रहा है.

इन दिनों जहां कोरोना वायरस संक्रमण के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है. वहीं किन्नर समुदाय के लिए कोरोना वैक्सीन लगाए जाने की कोई तैयारी न सरकार द्वारा की गई है न ही किसी एनजीओ ने इस दिशा में कदम आगे बढ़ाया है. इतने दिनों बाद भी किन्नरों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए किसी तरह का प्रयास नहीं किया गया है.

इस संबंध में हमने बात की किन्नर सर्विस के कोफाउंडर मनीष जैन से. उन्होंने बताया कि किन्नर समुदाय कोरोना संक्रमण काल में भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है. इनके लिए सुविधाएं नहीं दी जा रही है. कोरोना संक्रमण से जूझते हुए देश को साल भर से अधिक का समय बीत गया है मगर कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है.

सरकार आम जनता के लिए कई कैंप लगा रही है, लगातार उन्हें बचाने की कोशिशों में लगी हुई है मगर किन्नर समुदाय की तरफ अबतक किसी सरकार या एनजीओ का ध्यान नहीं गया है. अधिकतर किन्नर ऐसे ही हैं जिन्हें कोरोना वैक्सीन की एक डोज भी नहीं लगी है. न ही इन्हें कोरोना वैक्सीन लगवाने की पूर्ण जानकारी है.

वोट बैंक नहीं है ये समुदाय

आमतौर पर ये माना जाता है कि किन्नर समुदाय किसी भी पार्टी का वोट बैंक नहीं है. इसलिए न ही इन्हें काम करने के मौके उपलब्ध कराए जा रहे है न ही स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही है. इस समय जब आम जनता को कोरोना वैक्सीन की जरुरत है तो किन्नर समुदाय को भी इसकी बहुत अधिक जरूरत है. इनके पास बुनियादी सुविधाएं ही नहीं है. रोजी रोटी के सभी साधन बंद हो चुके हैं. वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण का खतरा है जिससे बचाव होना भी संभव नहीं है.

सरकार व पार्टियों को जिस दिन किन्नरों में वोट बैंक नजर आने लगेगा उस दिन सभी किन्नरों की जिंदगी में सुधार हो जाएगा. उससे पहले दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर ये समुदाय अपने दम पर अपने हक की लड़ाई के लिए छोटे छोटे कदम उठाकर अपना जीवन यापन कर रहा है.

वैक्सीन के लिए कर रहे कोशिश

मनीष ने बताया कि इस समय कई कंपनियों के साथ मिलकर किन्नरों के लिए हेल्थ कैंप लगवाने की कोशिश की जा रही है. संस्था की कोशिश है कि डॉक्टरों से उनका चैकअप, वैक्सीन, दवाईयां उपलब्ध कराई जा सके. उम्मीद है कि जल्द से जल्द बड़े स्तर पर इनके लिए स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी. हालांकि छोटे स्तर पर काम चल रहा है. वहीं कई किन्नर खुद भी आगे बढ़कर वैक्सीन लगवाने और जांच करवाने जा रहे हैं. मगर ऐसे लोगों की संख्या कम है.

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