आज ही के दिन हुआ था कोलंबिया यान दुर्घटनाग्रस्त, यादों में जिंदा हैं भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला

rajesh ranjan singh
राजेश रंजन सिंह
(वरिष्ठ पत्रकार)

1 फरवरी, 2003. वो दिन जब कोलंबिया स्पेस शटल STS-107 धरती पर लौट रहा था, तभी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उसमें सवार सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई. यही खबर सुबह से शाम, शाम से रात और अगले कई दिनों तक चलते रही. दुर्घटना में मारे गए सभी नाम बार-बार टीवी के टिकर से गुजर रहे थे. रिक हसबैंड, विलियम मैककूल, माइकल एंडरसन, डेविड ब्राउन, लॉरेल क्लार्क और भारतीय मूल की पहली अमरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला.

कोलंबिया यान 16 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पर था और दुर्घटना के समय वह पृथ्वी की ओर लौट रहा था. दुर्भाग्यवश सबकुछ प्लानिंग के तहत नहीं हो सका और यान क्रैश कर गई. कहा जाता है कि उस दिन हरियाणा के करनाल शहर (जहां कल्पना ने जन्म लिया था) के एक स्कूल में विशेष आयोजन रखा गया था. लेकिन जैसे ही कोलंबिया के क्षतिग्रस्त होने की ख़बर पहुंची जश्न का माहौल मातम में बदल गया.

अपनी यात्रा के दौरान कल्पना ने चंडीगढ़ के छात्रों के लिए एक संदेश भी भेजा था. संदेश में उन्होंने कहा था,’सपनों को सफलता में बदला जा सकता है.इसके लिए आवश्यक है कि आपके पास दूरदृष्टि, साहस और लगातार प्रयास करने की लगन हो. आप सभी को जीवन में ऊंची उड़ान के लिए शुभकामनाएं’.

छात्रों को ऊंची उड़ान भरने की शुभकामना देने वाली कल्पना फिर धरती पर वापस नहीं आ सकी. कल्पना की मौत के बाद उनके प्रशंसकों ने ‘जब तक सूरज चाँद रहेगा कल्पना तेरा नाम रहेगा’ के नारे लगाए. आगे चलकर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक छोटे सौर पिंड का नाम कल्पना चावला रख दिया. ऐसे में कल्पना अंतरिक्ष से लेकर धरती तक अब भी हमारे बीच जीवित सी लगती हैं.

The crew of STS-107 in October 2001. From left to right: Brown, Husband, Clark, Kalpana Chawla, Anderson, McCool & Ramon (file photo)

कौन थी कल्पना चावला

कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था. उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती था. 8वीं क्लास में ही कल्पना ने अपने पिता से इंजीनियर बनने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उनके पिता की मर्जी कुछ और ही थी. वह उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे. खैर, कल्पना मानी नहीं. अंतरिक्ष में जाने के अपने सपनों को साकार करने के लिए कल्पना साल 1982 में अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई के लिए अमेरिका रवाना हुई. कल्पना ने फ्रांस के जान पियर से शादी की जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे. फिर साल 1988 में वो नासा अनुसंधान के साथ जुड़ीं. जिसके बाद 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया.

file photo: Kalpana Chawla

कल्पना की पहली सफल अंतरिक्ष यात्रा से दूसरी और आखिरी यात्रा तक

19 नवंबर साल 1997 को वह एस टी एस 87 कोलंबिया शटल से अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गईं. अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने यहं करीब 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की. इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान साल 2003 में कोलंबिया शटल से भरी. यह उनकी दूसरी और आखिरी उड़ान थी. 16 जनवरी, 2003 को स्पेस शटल कोलम्बिया से शुरू हुई. यह 16 दिन का अंतरिक्ष मिशन था, जो पूरी तरह से विज्ञान और अनुसंधान पर आधारित था. 1 फरवरी को धरती की तरफ लौटने के क्रम में ही यान क्षतिग्रस्त हो गया और कल्पना सहित 6 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई.

Rajesh Ranjan Singh

Sr. Journalist, Writer, Delhi College of Arts & Commerce/Delhi University alumni.

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