कोरोना वॉरियर्स की मौत के बाद मिले मुआवजा, JDA RIMS ने की गाइडलाइन बनाने की मांग

कोरोना वॉरियर्स! जिनके नाम पर कभी हेलीकॉप्टरों से फूलों की वर्षा कराई गई तो कभी इनके उत्साहवर्धन के लिए थाली पिटवाई गई. जो भीषण गर्मी में PPE किट में पसीने से तरबतर होकर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की सेवा में लगे रहे. जिन्हें दूसरों की सेवा करते-करते जब खुद संक्रमित हुए तो अपने ही अस्पताल में बेड तक नहीं मिला. जमीनी हकीकत ये है कि मृत्यु के बाद इन्हें मुआवजा तक नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में डॉक्टर्स एसोसियशनों को मांग करनी पड़ रही है कि डॉक्टर तो चले गए, अब कम से कम परिवार को मुआवजा तो दे दो. ताजा मामले में झारखंड के एक डॉक्टर की भी कोरोणा संक्रमण से मृत्यु हो गई है. 10 मई की सुबह डॉक्टर मोहम्मद सिराज ने कोरोना संक्रमण से हार कर दम तोड दिया.

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इस घटना के बाद राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रांची) की जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने राज्य के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है. इसमें डॉक्टरों की दयनीय हालत पर गंभीरता के साथ रोशनी डाली गई है. JDA का कहना है की डॉक्टर सिराज कोरोना संक्रमितों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए. दुर्भाग्य से उनकी हालत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में बेड की सुविधा भी नहीं मिली.

ऐसे में उन्हें रिम्स अस्पताल की जगह मेडिका अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. यहा समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई.

एक डॉक्टर का जाना राज्य के लिए भी दुखद है. लिहाजा डाक्टरों को भी शहीद का दर्जा दिया जाए. उनके परिवार के गुजर-बसर के लिए राज्य सरकार को चाहिए कि उचित मुआवजा दे और इस प्रकार की व्यवस्था बनाई जाए जिससे यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई अनहोनी हो तो उस डॉक्टर के परिवार को कहीं भटकना न पड़े.
संजय सेठ, सांसद, रांची

JDA ने की ये मांग

इस घटना के बाद एसोसिएशन ने ECMO की सुविधा, कोरोना संक्रमित होने पर इलाज का खर्चा बीमा द्वारा राज्य सरकार वहन करे, मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक मदद और मुआवजा दिए जाने की मांग की है. उच्चतम न्यायालय और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक अस्पताल में कोरोना ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों को व्यवथा मुताबिक हफ्ते में 48 घंटे काम करवाया जाए, इसके बाद उन्हें 15 दिन का क्वारंटाइन में रहने की व्यवस्था की जाए.

झारखंड सरकार पूरी तरह से फेल है. पूरा हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम ही कोलैप्स कर चुका है. आज जो घटना घटी, ये उसका निकृष्ट उदाहरण है. डॉक्टर जो दूसरों का दुख-दर्द दूर करते हैं, झारखंड की सरकार उनके दर्द को समझने के लिए पूरी तरह से असंवेदनशील हो चुकी है. सरकार को चाहिए कि कम से कम कोरोना वारियर्स के मिनिमम रिक्वायरमेंट्स को तो पूरा करे.
दीपक प्रकाश, अध्यक्ष, झारखंड बीजेपी

JDA अध्यक्ष डॉ. विकास कुमार ने कहा कि, डॉ. सिराज 18 दिनों से एडमिट थे और आज उनकी मृत्यु हो गई. उनके साथ असंवेदनशीलता बरती गई है. नैतिक तौर पर भी अभी तक न तो अस्पताल प्रशासन ने, न ही प्रशासन या किसी नेता ने ही उनके परिवार से मुलाकात की है. हमारी मांग है कि अस्पताल प्रशासन और सरकार एक नियत समय सीमा तय करे कि कब तक और कितना मुआवजा डॉ. सिराज के परिवार को मिलेगा. साथ ही सरकार इस संबंध में एक गाइडलाइन भी बनाए जिससे ऐसी अनहोनी होने पर हर बार मांग न करना पड़े.

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लगभग 900 डॉक्टर गंवा चुके हैं अपनी जान

आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना की पहली वेव में देशभर में लगभग 748 डॉक्टरों की जान गई थी. जबकि इस समय जारी दूसरी वेव में भी लगभग 140 डॉक्टर कोरोना संक्रमण के चलते काल के गाल में समां चुके हैं.

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