दुखद! दयनीय हालत में काम कर रहे इंटर्न डॉक्टर

नई दिल्ली. देशभर में कोरोना काल के मद्देनजर डॉक्टरों को बहुत महत्ता दी जा रही है. खासतौर से बीते साल कोविड की पहली वेव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के लिए थाली पिटवाई, फूलों की वर्षा करवाई. मगर इस लहर में ना ही डॉक्टरों के प्रति वो इज्जत बची और न ही लगाव.

हास्यास्पद !!! सरकारी नौकरी के लिए विज्ञापन, सफाई कर्मचारी को डॉक्टर से अधिक वेतन

आलम ये है कि राज्य सरकारें डॉक्टरों की मांगो पर गौर करना भी जरूरी नहीं समझ रही हैं. कई राज्यों में इंटर्न डॉक्टर दिहाड़ी मजदूर से भी कम वेतन पा रहे हैं या कई जगहों पर उन्हें सफाई कर्मचारी से भी कम वेतन देने की बात हो रही है. दरअसल इन दिनों कोविड ड्यूटी में इंटर्न डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगाई जा रही है. मगर इन इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला भत्ता किसी मजदूर या सफाई कर्मचारी से भी बेहद कम है.

डॉक्टरों के आगे झुकी सरकार, दोबारा की बहाली

इस संबंध में हमने बात की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जूनियर डॉक्टर नेटवर्क के को-कन्विनर डॉ. अनुराग अग्रवाल से. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में आमतौर पर सरकारी संस्थानों में इंटर्न डॉक्टरों को 12 हजार रुपये मासिक भुगतान किया जाता है. वहीं प्राइवेट संस्थानों में हालात अधिक बुरे है. यहां इंटर्नशिप करने पर इंटर्न डॉक्टरों को सिर्फ चार से पांच हजार रुपये ही मिलते है.

डॉक्टरों की मांग पर ध्यान दे सरकार, देखें वीडियो

उन्होंने बताया कि कोविड काल में डॉक्टरों के लिए नई सुविधा शुरु करने की घोषणा की गई थी. इसके तहत कोविड ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने तीन हजार अतिरिक्त यानी कुल 15 हजार रुपये की राशि दिए जाने का ऐलान किया गया था. हालांकि ये ऐलान अबतक कागजों पर ही है.

कुल 3000 इंटर्न

प्रदेश भर में प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में कुल 3000 इंटर्न है. इन सभी को सरकार द्वारा बहुत कम राशि का भुगतान किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के अधीन आने वाले इंटर्न डॉक्टरों को 23500 रुपये का भुगतान होता है. डॉक्टरों का कहना है कि जब दोनों ही इंटर्न समान काम करते हैं तो दोनों को मिलने वाली राशि में इतना अधिक अंतर नहीं होना चाहिए. आर्थिक रूप से भेदभाव कर सरकार डॉक्टरों का मनोबल गिराती हैं.

6 नहीं 12 घंटे होता है काम

डॉक्टरों का कहना है कि उनसे कोविड वॉर्ड में भी 12 घंटे की ड्यूटी कराई जाती है जबकि रुल के मुताबिक ड्यूटी सिर्फ छह से आठ घंटे की होती है. मगर इंटर्न डॉक्टरों के साथ समय को लेकर कोई रियायत नहीं बरती जाती. यही नहीं लगातार 14 दिन कोविड ड्यूटी करने के बाद क्वारंटीन रहने के लिए सिर्फ दो दिन दिए जाते हैं. इसके बाद वापस कोविड ड्यूटी में भेजा जाता है.

आफत !!! सरकार ने नहीं सुनी डॉक्टर्स की मांग, कार्य बहिष्कार को मजबूर

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि राज्य में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपंड काफी कम है. अगर एक इंटर्न डॉक्टर n95 मास्क रोजाना भी खरीदे तो शायद ये 12 हजार रूपये उसके लिए पूरे न पड़े. सरकार को सोचना चाहिए कि इंटर्न डॉक्टर कोरोना वायरस के दौर में मानव सेवा के लिए दिन रात जुटे हुए हैं. वो जान की बाजी लगाकर ड्यूटी कर रहे है. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

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