मजदूरों से भी कम मिला वेतन, डॉक्टरों की हड़ताल

  • अब 1350 डॉक्टर करेंगे कार्य बहिष्कार
  • मजदूर से भी कम वेतन ले रहे

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण काल में रोजाना ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं जिससे साफ जाहिर होता है कि कोरोना में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का शोषण भी हो रहा है. इसी शोषण का नजीता है कि अब राजस्थान के इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है. दरअसल, पूरा मामला राजस्थान का है जहां पर इंटर्न डॉक्टरों के साथ स्टाइपेंड के नाम पर भद्दा मजाक किया गया है. इन्हें मजदूरों को दी जाने वाली रकम से भी कम का स्टाइपेंड दिया जा रहा है.

दिहाड़ी मजदूर से भी कम पैसे में काम करते हैं डॉक्टर, दयनीय है हालात

दरअसल राजस्थान सरकार में इंटर्न डॉक्टरों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है उससे डॉक्टरों की दयनीय स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. राजस्थान में इंटर्न डॉक्टरों को को मात्र 233 रुपये का स्टाइपंड दिया जाता है. वहीं एक अकुशल मजदूर को भी 596 रुपये का भत्ता दिया जाता है. मगर राज्य सरकार की नजरों में इंटर्न डॉक्टरों का काम मजदूर से भी बेहद आसान होता है.

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शायद यही कारण है कि सरकार उन्हें अकुशल मजदूर से भी कमतर आंक रही है. इसीलिए राज्य सरकार को साल भर बाद भी इंटर्न डॉक्टरों का वेतन बढ़ाने का ख्याल नहीं आया है. बता दें कि एक साल के लिए इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टर को महीने में मात्र 6990 रुपये का भुगतान किया जाता है. ये राशि भी तब मिलती है जब इंटर्न डॉक्टर महीने भर कोई छुट्टी न ले.

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इस संबंध में ऑल इंडिया इंटर्न डॉक्टर एसोसिएशन ने चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा को पत्र भी लिखा है. इस पत्र के जरिए मांग की गई है कि इंटर्न स्टाइपंड को बढ़ाकर 14 हजार रुपये किया जाए. इसके अलावा भत्तों को भी दोबारा लागू किया जाए और उसे अन्य राज्यों के बराबर किया जाए. दरअसल राजस्थान में भत्तों के मामले में डॉक्टरों की हालत देश में सबसे दयनीय है.

अनिश्चितकालीन करेंगे हड़ताल

वहीं सरकार के उदासीपूर्ण रवैये के कारण अब डॉक्टरों ने निर्णय लिया है कि 20 मई से राज्य के 1350 इंटर्न डॉक्टर कोविड, नॉन कोविड, ओपीडी, आईसीयू सभी सेवाओं में सुबह 8 से 10 बजे तक कार्य बहिष्कार करेंगे. इससे कार्य प्रणाली पर जो भी असर पड़ेगा उसका सारा जिम्मा राज्य सरकार का होगा.

पत्र में की कई मांगें

इस संबंध में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. साहिल जसूजा ने बताया कि इंटर्न को कोविड ड्यूटी हजार्डियर वर्क इंसेंटिव भी नहीं दिया जा रहा है. सरकार ने अपना किया कोई वादा पूरा नहीं किया है. सरकार इंटर्न डॉक्टरों को इंसान तक नहीं समझ रही. सात हजार से भी कम रूपयों में डॉक्टर अपना गुजारा करे. सरकार इंटर्न डॉक्टरों का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रही है.

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इसके अलावा ऐसोसिशन ने पत्र में मांग की है कि कोविड में ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को प्रतिदिन एक हजार रुपये का भुगतान किया जाए. वहीं सरकार ने बीते साल कोविड इंसेंटिव राशि 5000 रुपये दिए जाने की घोषणा की थी. इसे भी जल्द से जल्द जारी किया जाए.

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एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. विकाश मिल्की का कहना है कि कोविड ड्यूटी के दौरान कई डॉक्टर भी कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे हैं. कई डॉक्टरों की मृत्यु भी हुई है. ऐसे में किसी डॉक्टर की मृत्यु होने पर उनके परिवार को 50 लाख रुपयों की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान भी किया जाए.

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