यहां बेहद कम है डॉक्टरों का स्टाइपंड

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल में इस समय डॉक्टर, नर्स समेत इंटर्न डॉक्टर भी जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. मेडिकल फ्रेटर्निटी के लोग फ्रंटलाइन में खड़े होकर कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे है. घंटो तक अलग अलग मरीजों का इलाज करना. मई की गर्मी में पीपीई किट पहन कर ड्यूटी करना ये अब डॉक्टरों के लिए आम हो गया है.

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मगर सरकार को डॉक्टरों की परेशानियों पर गौर करने का समय नहीं है. ऐसे में इंटर्न डॉक्टरों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है. इंटर्न डॉक्टर इन दिनों कोरोना वॉर्ड में ड्यूटी कर रहे है. इन्हें 8 से 12 घंटे की ड्यूटी करवाई जा रही है. चाहे पोस्ट कोविड मरीजों की काउंसलिंग हो या अस्पताल में वैक्सीन देना हर काम इंटर्न डॉक्टर कर रहे है.

सरकारों द्वारा जब स्टाइपंड देने की बात आती है तो इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपंड एक मजदूर के बराबर या इससे भी कम दिया जाता है. इंटर्न डॉक्टरों का ये हाल किबिहार सरकार को इश ससी एक राज्य का नहीं है बल्कि देश के अलग अलग राज्यों में ऐसा ही हाल है.

अबतक 1300 से अधिक डॉक्टरों ने गंवाई जान

इस संबंध में हमने बात की महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टर श्रेया नामजोषी से. उन्होंने बताया कि इन दिनों जो इंटर्न डॉक्टर सर्जरी और मेडेसिन में है उनसे कोविड ड्यूटी भी कराई जा रही है. इसके बाद भी उन्हें मात्र 11 हजार रुपये का मानदंड दिया जा रहा है. जबकि कई राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों के लिए भी 23 हजार रुपये का स्टाइपंड मिलता है. एक तरफ देशभर के इंटर्न डॉक्टर एक समान काम कर रहे हैं मगर उन्हें काम के लिए अलग अलग भुगतान किया जा रहा है.

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प्राइवेट में है बुरा हाल

महाराष्ट्र में 11 हजार रुपये एक इंटर्न डॉक्टर को मिलते है जबकि प्राइवेट कॉलेजों में हाल और भी बुरा है. कई प्राइवेट कॉलेज में 5000 रुपये का भुगतान होता है. हैरानी की बात ये है कि कुछ कॉलेज ऐसे भी हैं जो इंटर्नशिप करने पर डॉक्टरों को कोई स्टाइपंड नहीं देते. सरकार से कई बार मांग की गई है कि स्टाइपंड को बढ़ाया जाए मगर ऐसा नहीं हुआ. मगर कोविड ड्यूटी करने वाले डॉक्टर अगर कोरोना संक्रमित हो जाते हैं तो उनके लिए किसी तरह की सुविधा सरकार की ओर से नहीं दी गई है.

दुखद! दयनीय हालत में काम कर रहे इंटर्न डॉक्टर

कुछ समय पहले हरियाणा में इंटर्न करने वाली डॉ. सिमरन ने बताया कि हरियाणा में लगभग चार साल पहले तक सरकारी कॉलेजों में स्टाइपंड 12 हजार रुपये था. मगर सभी डॉक्टरों ने दो हफ्ते लंबी हड़ताल की, जिसके बाद सरकार डॉक्टरों के आगे झुकी और उनका स्टाइपंड बढ़ाकर 18 हजार किया. मगर प्राइवेट कॉलेज से इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को आमतौर पर किसी तरह का स्टाइपंड नहीं मिलता है. वहीं दूसरी तरफ सेंट्रल गर्वमेंट के कॉलेज से इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को 25 हजार रुपये स्टाइपंड मिलता है.

स्टाइपंड के बारे में जानकारी नहीं

हरियाणा की अन्य डॉक्टर कोमल ने बताया कि इन दिनों कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों को कॉलेज के बाहर भी पोस्टिंग दी गई है. ऐसे में कई इंटर्न को परेशानी हो रही है. इंटर्न को बहुत कम स्टाइपंड मिलता है. कई इंटर्न डॉक्टरों को ये जानकारी भी नहीं है कि उन्हें स्टाइपंड मिलेगा भी या नहीं. इस समय इंटर्न डॉक्टर को टेली कम्यूनिकेशन की ड्यूटी भी दी गई है. इस दौरान होम आइसोलेशन और पोस्ट कोविड मरीजों को टेली कंसलटेशन दिया जा रहा है. इसके अलावा कई कार्य करवाए जा रहे हैं. इंटर्न डॉक्टरों को किसी तरह के इन्सेंटिव नहीं मिल रहे हैं. एक तरफ इंटर्न डॉक्टरों को मात्र कुछ हजार रुपये का भुगतान होता वहीं कई जगह टेली कंसलटेशन के लिए फोन करने के लिए पैसा भी इंटर्न को अपनी जेब से लगाना पड़ रहा है.

बीएमसी से सीखे महाराष्ट्र

एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न महाराष्ट्र के जनरल सेक्रेट्री डॉ. गिरीजा प्रसाद पाटिल ने बताया कि मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से इंटर्न डॉक्टरों को 59 हजार रुपये दिया जा रहा है. इसके अलावा पूणे में भी 39 हजार रुपये का भुगतान हो रहा है. मगर बाकि महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपंड बहुत कम है. इंटर्न डॉक्टर जहां हर विभाग में ड्यूटी कर रहे है मगर उन्हें उसके अनुरूप स्टाइपंड नहीं मिलता. हाल ही में डॉ. राहुल ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए और आखिर उनका निधन हो गया. मगर सरकार की ओर से सुविधाएं नहीं दी गई. ऐसे में इंटर्न डॉक्टरों को चिंता है कि न ही उन्हें अच्छा स्टाइपंड मिल रहा है वहीं न ही किसी तरह का इंश्योरेंस भी दिया जा रहा है. ऐसे में इंटर्न डॉक्टर परेशान है.

कोरोना में ड्यूटी भी

गुजरात में इंटर्न डॉक्टरों की हालत हाल ही में थोड़ी सुधरी है. गुजरात के इंटर्न डॉक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इंटर्न डॉक्टरों का हाल बहुत अधिक अच्छा नहीं है. कोरोना ड्यूटी करते हुए भी डॉक्टरों को 18 हजार रुपये स्टाइपंड का भुगतान किया जा रहा है.

कागज पर सब बढ़िया

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एमएसएन यूपी के को-कन्विनर डॉ. अनुराग अग्रवाल से. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में आमतौर पर सरकारी संस्थानों में इंटर्न डॉक्टरों को 12 हजार रुपये मासिक भुगतान किया जाता है. वहीं प्राइवेट संस्थानों में हालात अधिक बुरे है. यहां इंटर्नशिप करने के लिए इंटर्न डॉक्टरों से ही 3 लाख रुपये की फीस वसूली जाती है. उन्होंने बताया कि कोविड काल में डॉक्टरों के लिए नई सुविधा शुरु करने की घोषणा की गई थी. इसके तहत कोविड ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने तीन हजार अतिरिक्त यानी कुल 15 हजार रुपये की राशि दिए जाने का ऐलान किया गया था. हालांकि ये ऐलान अबतक कागजों पर ही है.

राजस्थान में भी थे बुरे हाल

राजस्थान में अबतक काफी बुरे हाल थे. इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से 233 रुपये प्रतिदिन के आधार पर इंटर्नशिप स्टाइपंड पा रहे थे. इसके खिलाफ लंबे समय तक आंदोलन करने के बाद हाल ही में सरकार ने नए आदेश जारी किए हैं जिसमें इंटर्न डॉक्टरों को 14 हजार रुपये स्टाइपंड दिए जाने का वादा किया गया है.

इस संबंध में ऑल राजस्थान इंटर्न डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. साहिल जसूजा, उपाध्यक्ष डॉ. विकाश मिल्की और महासचिव डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने हमारी मांगो को पूरा किया है जिसके बाद डॉक्टरों में खुशी है.

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