डॉक्टरों पर हो रहे हमलों पर युवा डॉक्टरों ने कही ये बात

नई दिल्ली. एक डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म है मरीज को ठीक करना उसकी जान बचाना. इसके अलावा डॉक्टर से कुछ अपेक्षा भी नहीं की जाती. इसलिए डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप भी कहा जाता है. मगर कई बार देखा जाता है कि अगर मरीज ठीक नहीं हुआ या उसकी मौत हो गई तो लोग धरती के इस भगवान के साथ ही दुर्व्यवहार शुरु कर देते है.

अबतक 1300 से अधिक डॉक्टरों ने गंवाई जान

हाल के दिनों में डॉक्टरों के साथ हिंसा के कई मामले देखने को मिल है. पहले भरतपुर में दो डॉक्टरों को गोली मारी गई. इस घटना से डॉक्टरों का गुस्सा शांत भी नहीं हुआ था कि एक जून को असम के होजाई में गुस्साई भीड़ ने डॉक्टर को डंडों, लात, घूसों से मारा. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. इसके बाद कर्नाटक में भी डॉक्टर के साथ मार पिटाई की घटना सामने आई.

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ऐसे भय भरे माहौल को देखते हुए ही कई डॉक्टर अपने डॉक्टर करियर की शुरुआत कर रहे है. हमने इन घटनाओं को लेकर बात की देश के अलग अलग हिस्सों के इंटर्न डॉक्टरों से. डॉक्टरों के साथ अस्पताल में हो रही ऐसी हिंसक घटना पर डॉ. श्रेया नामजोषी ने बताया की ऐसी घटनाओं को सुनकर घबराहट होती है. उन्होंने कहा कि कई बार नाइट शिफ्ट करनी पड़ती है ऐसे में इस तरह की घटना होने का डर हमेशा बना रहता है. मगर हमें इस डर के साथ ही अपनी ड्यूटी करनी होती है.

कर्नाटक में डॉक्टर के साथ हुई मारपीट, वीडियो वायरल

एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न महाराष्ट्र के जनरल सेक्रेट्री डॉ. गिरीजा प्रसाद पाटिल का कहना है कि डॉक्टरों पर ऐसे अटैक अब आए दिन होने लगे है. देश के किसी न किसी कोने से ऐसी घटना सामने आ जाती है. सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए. हर अस्पताल में क्विक रिस्पॉन्स टीम का गठन होना चाहिए. अस्पतालों में सुरक्षित वातावरण के अलावा जिन डॉक्टरों की गलती नहीं होती फिर भी वो शिकार होते है. उन्हें मुआवजा भी मिलना चाहिए.

माफी मांगे बाबा रामदेव , डॉक्टर एसोसिएशन की मांग

हरियाणा से एक इंटर्न डॉक्टर जिनकी इंटर्नशिप को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है. उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डॉक्टरों के साथ हो रही हिंसक घटनाएं आज का कड़वा सच है. वेंटिलटर खराब हो या ऑक्सीजन की कमी हो सभी के लिए डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया जाता है. हमें मरीजों को ठीक करने की जिम्मेदारी दी जाती है ना की अस्पताल में सुविधाएं मुहैया कराने की. डॉक्टर सालों तक पढ़ाई करने और कई उचार चढ़ाव देखने के बाद एक डॉक्टर बनता है. मरीज को ठीक कर घर भेजना ही डॉक्टर का मोटिव होता है. वहीं आज के समय में जिस तरह से डॉक्टरों के साथ हिंसक घटनाएं हो रही है उसे देखकर दुख होता है.

इन डॉक्टरों को भी दें कोरोना ड्यूटी का मौका

आईएमए जूनियर स्टूडेंट नेटवर्क के अनुराग का कहना है कि अगर सरकार कोरोना संक्रमण काल में भी डॉक्टरों की हिफाजत नहीं कर पा रही है तो डॉक्टरों पर एपिडेमिक एक्ट के तहत जरूरी ड्यूटी देना भी अप्लाई नहीं किया जा सकता है. सरकार बॉन्ड भरवाकर रुरल एरिया में डॉक्टरों से ड्यूटी करवा रही है मगर उन्हीं डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सरकार कोई जिम्मेदारी नहीं निभाती. ऐसे निंदनीय घटनाओं पर सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए. ऐसे दोषियों के खिलाफ नॉन बेलेबल वॉरंट होना चाहिए ताकि कोई ऐसी घटना को अंजाम न दे सके. इसी के साथ दोषियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जानी चाहिए जहां पीड़ित डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ को न्याय मिल सके ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो सके.

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मध्यप्रदेश के भोपाल से डॉ. रिया हल्दर का कहना है कि डॉक्टर इन दिनों बहुत मेहनत के साथ काम कर रहे है. लगातार 8 घंटों तक पीपीई किट पहने ड्यूटी करनी पड़ती है. इन 8 घंटों तक न खा सकते है न ही कुछ पी सकते है. कोविड ड्यूटी पर जाने से 2 घंटे पहले से डॉक्टर कुछ खाना पीना छोड़ देते है. कई बार अपने साइज की पीपीई किट नहीं होने पर हम एडजस्ट करके पीपीई किट पहनते है. खुद पर संक्रमण का खतरा होने के बाद भी इलाज करते है. अस्पतालों में मरीज की अपेक्षा और डॉक्टरों पहले से कम है. वही कोरोना संक्रमण काल में ये गैप अधिक बढ़ गया है. कई बार एक ही डॉक्टर 150 मरीज देख रहा होता है. डॉक्टर पर भी काम का अधिक भार है. इन दिनों डॉक्टर कई कई दिनों तक अपने घर नहीं जा पा रहे है. ऐसे माहौल में डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं देखा बहुत दुख देता है.

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गुजरात इंटर्न मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मीत ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो जनता को समझना होगी कि डॉक्टरों के पास बहुत अधिक वर्कलोड है. डॉक्टर गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे मरीज को भी ठीक करने और उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश करते है. मगर जिस तरह से रामदेव के बयानों और डॉक्टर के साथ हो रही हिंसक घटनाओं पर सरकार ने चुप्पी साधी हुई है डॉक्टर लाचार होकर बैठे है. सरकार को डॉक्टरों का बचाव करना चाहिए मगर वो इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही. न किसी के बयान बंद हो रहे है और न ही डॉक्टरों पर हमले सरकार रोक पा रही है.

अब जन सुनवाई के आसरे पर डॉक्टर

हरियाणा से इंटर्न कर रही एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि करियर के शुरुआत होते ही डॉक्टरों के साथ मार पीट की घटनाएं देखना दुखद है. ये समझना मरीज के तीमारदारों की जिम्मेदारी है कि डॉक्टर इंसान है जो अपनी पूरी कोशिश करते हुए मरीज की जान बचाने में जुटे रहते है. ये तिमारदार खुद डॉक्टर को मारने पर उतारु हो जाते है. अब समय है कि ऐसे तीमारदारों को याद दिलाया जाए की डॉक्टरों के पास भी उनके अधिकार है.

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