हास्यास्पद !!! सरकारी नौकरी के लिए विज्ञापन, सफाई कर्मचारी को डॉक्टर से अधिक वेतन

नई दिल्ली. कोरोना वॉरियर्स का उत्साहवर्धन करने के लिए बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर फूलों की बारिश की गई थी. इसके अलावा कभी थाली पिटवाई गई तो कभी दिये जलाकर उनका उत्साह बढ़ाया गया. मगर अब कोरोना वॉरियर्स की हालत ऐसी हो गई है कि सरकार खुद ही उनका मनोबल तोड़ रही है.

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इसका हालिया उदाहरण देखने को मिला उत्तर प्रदेश सरकार के उस विज्ञापन में जहां एक एमबीबीएस डॉक्टर का प्रति दिन का वेतन एक सफाई कर्मचारी से भी कम रखा गया है. कार्यालय महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश की ओर से एक भर्ती विज्ञापन निकाला गया है. इस भर्ती विज्ञापन में दो पद अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं.

बीते 8 मई को निकाले गए इस विज्ञापन में एमबीबीएस अंतिम वर्ष के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए गए हैं. इसके साथ ही कोविड में प्रति शिफ्ट के लिए मानदेय 300 रुपये रखा गया है. वहीं हास्यास्पद बात है कि वॉर्ड बॉय या सफाई कर्मचारी के लिए वेतन 359 रुपये रखा गया है. यानी कोविड काल में योगी सरकार सफाई कर्मचारी को एक डॉक्टर से अधिक वेतन देने की इच्छुक है.

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ऐसे ही कई मामलों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. इस पत्र में डॉक्टरों ने मांग की है कि कोविड ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों को पर्याप्त संख्या में पीपीई किट, मास्क, ग्ल्वस आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. सरकारी और प्राइवेट कॉलेज के डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपंड भी बढ़ाया जाए.

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आईएमए स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई की स्टेट सेक्रेट्री साक्षी सिंह ने कहा कि कोविड में ड्यूटी कर रहे पोस्ट इंटर्न, इंटर्न और फाइनल ईयर के मेडिकल छात्रों का 50 लाख का बीमा भी सरकार द्वारा करवाना चाहिए. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कोविड में जब कोई व्यक्ति घर से बाहर निकलने में भी डर रहा है वहीं डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ अपनी और अपने परिवार जान की की बाजी लगाकर मरीजों की जान बचाने में लगे हैं.

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वहीं दूसरी ओर सरकार है कि उनके हितों पर विचार नहीं कर रही. हाल ही में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि पीजी नीट के एग्जाम को पोस्टपोन किया जाए. इसके बाद से छात्रों का मनोबल टूट सा गया है. दरअसल मेडिकल पीजी के रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग है कि अगर सरकार तीन से चार महीनों के लिए पीजी एग्जाम को टालेगी तो इससे पीजी कर रहे डॉक्टरों को मानसिक त्रासदी झेलनी पड़ेगी. किसी छात्र का पूरे 6 महीने का समय सरकार एग्जाम टाल कर खराब कर रही है.

आईएमए स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई के स्टेट कन्वीनर लखन प्रकाश गुप्ता ने बताया कि डॉक्टरों को किसी तरह की सुविधा मुहैया नहीं हो रही है. साढ़े चार साल तक पढ़ाई करने के बाद भी सरकार उन्हें एग्जाम में बैठने नहीं दे रही है. डॉक्टरों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है. कई अस्पतालों में मेडिकल स्टूडेंट्स अपने पैसों से पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स खरीदने को मजबूर हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों जब डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ पर मरीजों का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है तो सरकार को चाहिए की उनका अधिक ध्यान रखे बल्कि सरकार डॉक्टर और मेडिकल फ्रेटर्निटी को ही परेशान करने में लगी हुई है. सरकार को जल्द से जल्द हमारी मांगों को पूरा करना चाहिए.

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