हरियाण के मंत्री का बड़ा बयान, मुफ्ट में बंटेगी कोरोनिट किट, शुरु हुआ विरोध

नई दिल्ली. योग गुरु बाबा रामदेव जो इन दिनों विवाद में बने हुए हैं. ट्वीटर पर बाबा रामदेव को अरेस्ट करने की मांग की जा रही है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन, फोर्डा, समेत देश भर के डॉक्टर एसोसिएशन बाबा रामदेव के खिलाफ आकर खड़े हो गए हैं. सभी एक सुर में बाबा रामदेव को अरेस्ट करने की मांग कर रहे हैं. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने तो बाबा रामदेव के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करा दी है.

इसी बीच हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर एक नई जानकारी साझा की है. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि कोरोना के मरीजों को अब हरियाणा में एक लाख पतंजलि की कोरोनिल किट मुफ्ट में बांटी जाएगी. कोरोनिल का आधा खर्च पतंजलि ने और आधा खर्चा हरियाणा सरकार के कोविड राहत कोष से वहन किया जाएगा.

स्वास्थ्य मंत्री ने लगाई बाबा रामदेव को फटकार, कहा वापस लें बयान

एक तरफ जब देश भर के डॉक्टर बाबा रामदेव के विरोध में आ गए हैं. यहां तक की देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव के बयानों की निंदा की और उन्हें अपने बयान वापस लेने की चेतावनी तक दे दी. उस दौरान इस तरह बाबा रामदेव की कोरोनिल को मुफ्त में बांटना किसी प्रचार से कम नहीं लग रहा.

कोरोनिल के प्रमाण पर सवाल

इन दिनों सोशल मीडिया पर उठे बवाल में डॉक्टर पहले से ही बाबा रामदेव के पतंजलि द्वारा निर्मित दवाई कोरोनिल पर सवाल उठा रहे हैं. कई एसोसिएशनों का कहना है कि कोरोनिल को विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी गई है. इसके बावजूद बाबा रामदेव कोरोनिल दवाई का प्रचार धड़ल्ले से किए जा रहे हैं.

डॉक्टरों ने किया विरोध

एक तरफ जहां देश भर में डॉक्टर एलोपैथी का विरोध करने पर रोष में है वहीं राज्य सरकार पतंजलि को बढ़ावा देने का काम कर रही है. राज्य सरकार का ये कदम डॉक्टरों में कही न कही दुख पैदा कर सकता है. सोशल मीडिया पर हरियाणा सरकार के इस कदम का डॉक्टरों ने विरोध किया. ट्वीटर यूजर का कहना है कि मेडिकल फ्रेटर्निटी की बेइज्जती करने वाले बाबा के प्रोडक्ट का प्रचार बंद होना चाहिए. महामारी में भी ये सिर्फ पैसा कमाने के पीछे पड़े हैं.

विश्वसनीय नहीं है कोरोनिल

इस संबंध में हमने बात की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई के सदस्यों ने बताया कि एलोपैथी में इस्तेमाल होने वाली हर दवाई का लंबे समय तक ट्रायल किया जाता है. इन दवाईयों को आईसीएमआर, विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे संगठनों से मंजूरी मिलती है. इसका डॉक्यूमेंट बनाया जाता है उसके बाद इसे मरीजों को दिया जाता है. मगर जहां तक कोरोनिल की बात है वो कोरोना के इलाज के लिए सर्टिफाईड नहीं है. इसके ट्रायल किए जाने के कोई प्रमाण भी नहीं है.

कोरोनिल को अगर इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो ठीक है मगर इसे मूल रूप से कोरोना का इलाज करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अगर कोरोनिल इतनी ही विश्वसनीय दवाई है तो सरकार भी इसे ही लोगों में बांटती. मगर सरकार सिर्फ वैक्सीनेशन पर जोर दे रही है. इसी से इसकी विश्वसनीयता सामने आ जाती है.

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