कोरोना ने तोड़ी जर्मनी की आर्थिक कमर, GDP में 10 फीसदी की गिरावट

कोरोना महामारी ने दुनिया भर के देशों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. लगभग सभी देशों की हालत आर्थिक मोर्चे पर खराब हो चुकी है. यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले जर्मनी के जीडीपी में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है. 2020 की दूसरी तिमाही में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 10 फीसदी से भी अधिक की कमी आई है. फिर भी देश में बेरोजगारी दर नहीं बढ़ी है.

ताजा आर्थिक आंकड़े दिखाते हैं कि 2020 की दूसरी तिमाही में जीडीपी 10.1 फीसदी कम हुई है. इस समय जर्मनी में बहुत सारे लोग ‘फरलो प्रोग्राम’ का हिस्सा बने हुए हैं जिसके कारण देश की बेरोजगारी दर जस की तस बनी हुई है और लोगों की नौकरियां नहीं छूटी हैं. आर्थिक डाटा जारी करने वाले जर्मनी के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि “1970 में जबसे जीडीपी की गणना शुरु हुई तबसे किसी तिमाही के लिए दर्ज हुई यह सबसे बड़ी गिरावट है.” यह डाटा ऐसे समय में आया है जब जर्मनी में पहले से ही कोरोना वायरस की दूसरी लहर आने की संभावना प्रबल मानी जा रही है.

2008-2009 में आए विश्व आर्थिक संकट के दौरान भी इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई थी. जर्मनी के वित्त मंत्री पेटर आल्टमायर ने कुछ महीने पहले ही चेतावनी दी थी कि महामारी के कारण जर्मनी को “सबसे बड़ी मंदी” का सामना करना पड़ सकता है, जो कि विश्व युद्ध खत्म होने के बाद से लेकर अब की सबसे बड़ी गिरावट होगी. अप्रैल-जून तिमाही के दौरान निर्यात लगभग ठप्प रहा और सरकारी खर्च में काफी बढ़ोत्तरी करनी पड़ी.

मार्च में ही जर्मनी के आर्थिक सलाहकारों के एक पैनल ने अनुमान लगाया था कि कोरोना वायरस के कारण आए संकट से देश की कुल सालाना जीडीपी में 2.8 प्रतिशत की कमी आ सकती है. लेकिन यह गणना इस आधार पर की गई थी कि लॉकडाउन पांच हफ्ते से लंबा नहीं चलेगा और उसके बाद छूट मिलने लगेगी.

इस गिरावट के असर से निपटने के लिए सरकार ने कई अरब यूरो के पैकेज का एलान किया है, जिसका कुछ हिस्सा इमरजेंसी लोन, क्रेडिट गारंटी तो कुछ टैक्स में छूट के रूप में दिया जाना है. जल्दी ही फ्रांस और इटली जैसे दूसरे यूरोपीय देशों का आर्थिक डाटा जारी होने वाला है, जिनमें भी जर्मनी से मिलती जुलती गिरावट दिखने का अनुमान है.

जीडीपी में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद, जर्मनी में बेरोजगारों की तादाद में अंतर नहीं आया है. मई के महीने तक करीब 67 लाख लोगों को जर्मनी के ‘फरलो प्रोग्राम’ में शामिल किया गया, जो कि अप्रैल में 61 लाख थे. नतीजतन, जुलाई में भी जर्मनी की बेरोजगारी दर 6.4 फीसदी पर स्थिर रखी जा सकी. जानकारों का कहना है कि अब देश महामारी के आर्थिक दुष्प्रभावों को धीरे धीरे कम करने की दिशा में बढ़ने लगा है.

आईएनजी बैंक के इकोनॉमिस्ट कार्स्टेन ब्रजेस्की का कहना है कि साल की तीसरी तिमाही में “एक बड़ा उछाल” देखने को मिल सकता है. लेकिन उनका अनुमान है कि आर्थिक सुधारों की राह काफी “लंबी और उबड़ खाबड़” रहने वाली है. ब्रजेस्की ने बताया कि सरकारी मदद से घरेलू मोर्चे पर तो सेवा और निर्माण सेक्टर को संभाला जा सकता है लेकिन मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में दोबारा उछाल तभी आएगा जब विदेशों से मांग बढ़ेगी और यह इस पर निर्भर करेगा कि दूसरे देश महामारी से कैसे निपटते हैं.

पूरे साल 2020 के लिए जर्मन सरकार ने अपने जीडीपी के 6.3 फीसदी सिकुड़ने का अनुमान लगाया है जबकि 2021 में इसमें 5.2 फीसदी की बढ़त दर्ज होने की उम्मीद है. वहीं, यूरोपीय आयोग ने इस साल फ्रांस, इटली और स्पेन की अर्थव्यवस्था में 10 फीसदी से भी अधिक की गिरावट आने का अनुमान लगाया है.

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