ब्लैक फंगस में ब्लड शुगर चैक करना है क्यों है जरूरी, डॉक्टर से जानें

नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है. वहीं जो लोग इस जंग को जीत गए हैं उनके लिए आगे मुश्किलें कम नहीं हुई है. कई पोस्ट कोविड मामलों में अब ब्लैक फंगस के मामले भी देखे जा रहे है. गंभीर बात ये है कि इस बीमारी को अगर शुरुआत में ही पहचान लिया जाए तो इसका इलाज आसानी से हो जाता है. अगर इसमें देरी की जाए तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है.

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इस बीमारी को लेकर हमने बात की एम्स के प्रोफेसर एनेस्थॉलॉजी डॉ. युद्धयवीर सिंह से. उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के गंभीर बीमारी है. ये आमतौर पर उन मरीजों को हो रही है जो कोरोना संक्रमित हुए और हाल ही में इलाज करवा कर ठीक हुए हैं. ऐसे में कोरोना से ठीक हुए मरीजों को अपना अधिक ख्याल रखने की जरूरत है ताकि इस बीमारी से अपना बचाव कर सकें.

इन्हें है खतरा

डॉ. युद्धयवीर सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस के मामले इन दिनों बढ़ रहे हैं. इसे लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है. दरअसल ये एक फंगल इंफेक्शन है. थोड़ा फंगल इंफेक्शन होना वैसे तो आम होता है मगर इन दिनों ये फंगल इंफेक्शन जानलेवा बन चुका है. इसलिर सरकार ने इसे नोटीफाई भी किया है. कई राज्यों में इसे महामारी तक घोषित किया गया है.

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इस जानलेवा बीमारी का खतरा वैसे हर किसी मरीजो को नहीं है. मगर मरीजों को अपना ख्याल रखे की जरुरत है. इस बीमारी से उन्हें खतरा है जो मरीज कोरोना संक्रमण के साथ ही किसी अन्य बड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं मसलन डायबीटिज, कैंसर, किडनी रोग आदि.

ये है कारण

दरअसल कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों को स्टीरॉयड की डोज दी जाती है. ये कोरोना संक्रमित मरीजों को फायदा करती है. स्टीरॉयड का सेवन करने से पहले कई ध्यान रखें की इसे एक सीमित मात्रा में लेना होता है. इसकी डोज डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब करवाने के बाद ही लें. खुद से इसका सेवन न करें क्योंकि ये घातक साबित हो सकता है. स्टीरॉयड जितने दिन के लिए डॉक्टर ने लेने को कहा है उतने दिन ही इस्तेमाल करें.

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डॉ. के मुताबिक अगर स्टीरॉयड का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसके साथ शरीर में ब्लड शुगर का लेवल भी समय समय पर चेक करते रहें. शरीर में ब्लड शुगर का लेवल नॉर्मल बनाए रखना बहुत जरूरी है. अगर मरीज को डीयबीटिज नहीं है तो भी ब्लड शुगर का लेवल चैक करने में कोताही न बरतें. दरअसल अगर शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है तो इससे फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.

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