न जनता साथ न सरकार, डॉक्टर अकेले हो रहे परेशान

नई दिल्ली. एक मामूली सा ड्यूटी करता डॉक्टर ही तो मार खाया है. कोई कंगना रनौत को धमकी थोड़ी मिली है की Y+ सिक्योरिटी मिल जाएगी. मात्र 1000 डॉक्टर ही तो शहीद हुए हैं. कोई फिल्म अभिनेता थोड़ी मरा है की पूरे देश की जनता न्याय के लिए खड़ी हो जाएगी. ये कहना है साक्षी सिंह का जो कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन-मेडिकल स्टूडेंट्स नेटवर्क, उत्तर प्रदेश की स्टेट जनरल सेक्रेट्री है.

मध्यप्रदेश डॉक्टरों के समर्थन में कहीं कैंडल मार्च तो कहीं हुआ रक्तदान

गौरतलब है कि बीते साल कोरोना महामारी शुरु होने के साथ ही डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल स्टाफ कोरोना वॉरियर बनकर सामने आए है. इन सभी कोरोना वॉरियर्स के चलते कोरोनासंक्रमित मरीजों का इलाज हो सका. शुरुआत में संक्रमण का खतरा इतना अधिक था कि परिवार वाले भी संक्रमितों के लिए आगे नहीं आ रहे थे. मगर सिर्फ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने अपनी ड्यूटी निभाई.

असम में डॉक्टर को भीड़ ने मारा, डॉक्टरों में नाराजगी

बीते कुछ दिनों में डॉक्टरों के साथ मारपीट और हमले की घटनाएं बढ़ी है. इस हफ्ते भी ऐसी तीन घटनाएं हो चुकी है. कुछ दिनों पहले राजस्थान के भरतपुर में डॉक्टरों को गोली मारनी की घटना देखने को मिली. इसके बाद असम और अगले ही दिन कर्नाटक में डॉक्टर पर हमला हुआ. इन घटनाओं के बाद डॉक्टरों में रोष है. जनता के बाद अब सरकार भी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है. ताजा मामला मध्यप्रदेश का है जहां सरकार के कारण 3000 डॉक्टरों को इस्तीफा देना पड़ा.

परेशान और दुखी अस्पताल स्टाफ के साथ कैसे होगा मरीजों का इलाज

डॉक्टरों के साथ ऐसे व्यवहार को देखते हुए अब डॉक्टरों के मन में भी दुख है. इस संबंध में आईएमए स्टूडेंट्स नेटवर्क की उत्तर प्रदेश ईकाई के स्टेट कन्वीनर लखन प्रकाश गुप्ता ने भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ हिंसा के मामले नए नहीं है. मरीज के परिवार के सदस्य भावनाओं में बहकर ऐसा व्यवहार करते रहे है. मगर उन लोगों को ये समझना होगा कि डॉक्टर यही चाहता है कि मरीज ठीक होकर उनके पास से जाए. हर डॉक्टर की कोशिश होती है मरीज को बचाने और उसे ठीक करने में जुटा रहता है. डॉक्टर भी इंसान है और मानवता के नाते भी ये कर्तव्य बनता है.

अबतक 1300 से अधिक डॉक्टरों ने गंवाई जान

डॉक्टर का धर्म ही मरीज को बचाना है, जिसके लिए कई प्रयास किए जाते है. अधिकतर मामलों में सफलता मिलती है जबकि कुछ मामलों में सफल नहीं हो पाते. वहीं अगर मरीज बच नहीं पाया तो उसके परिवार के सदस्य अस्पताल में हिंसा करना शुरु कर देते है. ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार से गुजारिश है की डॉक्टरों को कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई जाए. क्योंकि ऐसे हालातों में डॉक्टर व स्टाफ को संभलने का मौका भी नहीं मिलता है. वहीं डॉक्टरों के साथ हिंसा करने के कानूनों को भी मजबूत बनाना चाहिए. ऐसी वारदात को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि डॉक्टर को भुगतना न पड़े.

आईएमए ने बाबा रामदेव को भेजा 1000 करोड़ का नोटिस

इस मामले पर वेदकुमार घंटाजी ने भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे देश में रह रहे है जहां बाबा रामदेव जैसे लोग खुलेआम एलोपैथी के खिलाफ बोलते है और जनता उनकी बात का समर्थन करती है. जनता को डॉक्टरों द्वारा कमाया हुआ नाम और पैसा दिखता है मगर उसके पीछे उनकी मेहनत का कोई अंदाजा नहीं होता. यहां तो सरकार भी युवा डॉक्टरों को गांव में ड्यूटी करने के लिए भेजना चाहती है मगर उन्हें सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं देने में कतराती है. यहां क्रिकेट, राजनीति जैसे मुद्दों पर रोज चर्चाएं होती है मगर जब किसी डॉक्टर को पीटा जाता है तो जनता उनके लिए आगे नहीं आती. लोगों को उनके बड़े से बड़े जुर्म के लिए भी नहीं कुछ नहीं कहा जाता मगर डॉक्टरों को हल्के से शक के बिनाह पर ही मारा पीटा जाता है. देश के माहौल में डॉक्टर दिन रात डर में जीते है.

अस्पताल जाने पर हो सकती है परेशानी, स्टाफ की है हड़ताल

सफदरजंग अस्पताल में ईएनटी सर्जन डॉ. कृष्ण राजभर का कहना है कि कोरोना के काल में जब स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई तो डॉक्टरों ने ही कम सुविधाओं के साथ भी मोर्चा संभाले रखा. किसी डॉक्टर ने इलाज को लेकर अपने हाथ खड़े नहीं किए. असम की घटना में जब मरीज की मौत हुई तो इसका इल्जाम डॉक्टर पर आया. लोग ये भूल जाते हैं कि खुद डॉक्टर भी कोरोना वेव में इलाज करते हुए अपनी जान गंवा चुके है. आज भी डॉक्टर ही हैं जो मरीजों के बीच जाकर इतने रिस्क के साथ उनका इलाज कर रहे है. मगर जिस तरह डॉक्टरों के साथ हिंसा होती है उससे साफ है कि डॉक्टरों पर जनता को भरोसा नहीं है. ये बात विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे में भी सामने आई थी कि भारतीय डॉक्टरों को उनके देश में बहुत कम इज्जत दी जाती है. भारत में मरीज के तीमारदारों की आदत हो गई है अपना गुस्सा डॉक्टरों पर निकालने की या अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की. आज जरुरत है की जनता की मानसिकता को बदला जाए.

कर्नाटक में डॉक्टर के साथ हुई मारपीट, वीडियो वायरल

झांसी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. आशीष कनोजिया के मुताबिक इलाज के दौरान मरीज की मौत होने पर परिजन द्वारा गाली गलौच, मारपीट या अपनामित करने की घटनाएं होती रहती है. ये घटनाएं डॉक्टर को शारीरिक और मानसिक रुप से व्यथित करने का कारण बनती है. अधिक अवसाद में कई जूनियर डॉक्टर आत्महत्या करने जैसे दुखद कदम उठाने तक को मजबूर हो जाते है.आज के परिप्रेक्ष्य में ये बहुत जरूरी है कि सरकार और चिकित्सा संस्थान जूनियर डॉक्टों की परेशानियों को बारीकी से समझे. उन परेशानियों के निराकरण के लिए सकारात्मक प्रयास करे.

डॉक्टरों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं पर जानें डॉक्टर की राय, देखें वीडियो

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