आफत !!! सरकार ने नहीं सुनी डॉक्टर्स की मांग, कार्य बहिष्कार को मजबूर

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल में सबसे अधिक जिम्मेदारी डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और अस्पताल की है. मरीजों का इलाज, उनकी देखभाल करने से लेकर दवाई आदि की सुविधाएं देना सब का बीड़ा इनके उपर है. ऐसे में अगर कोरोना संक्रित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर काम करना बंद कर दें तो हालात कितने बिगड़ सकते हैं इसकी संभावना भी नहीं की जा सकती.

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मगर राजस्थान सरकार को डॉक्टरों के होने या न होने से कोई फर्क पड़ता नहीं दिखता. यही कारण है कि डॉक्टरों के बार बार अल्टिमेटम दिए जाने के बाद भी सरकार ने डॉक्टरों की मांगे सुनने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. आपको बता दें ये पूरा मामला अजमेर का है.

अजमेर के सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टर्स सोमवार से अपनी मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार करेंगे. इस संबंध में डॉक्टरों ने रविवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा को पत्र लिखकर अवगत कराया. इससे पहले डॉक्टर्स का काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी रहा. डॉक्टरों ने एक घंटे काम का बहिष्कार भी किया.

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पीपीई किट पहने काले पट्टी बांध कर काम करते डॉक्टर

सरकार का नहीं कोई ध्यान

रेजिडेंट चिकित्सक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर गोवर्धन लाल सैनी ने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है. अबतक किसी तरह का सकारात्मक जवाब सरकार की तरफ से नहीं मिला है. हमने रविवार तक सरकार के जवाब का इंतजार किया. रविवार 16 मई को भी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा को पत्र लिखा है. साथ ही ये चेतावनी भी दी है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर गौर नहीं करेगी तो डॉक्टरों द्वारा रोज दो घंटे कार्य बहिष्कार किया जाएगा.

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डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों का इलाज करना हमारी जिम्मेदारी है. महामारी के इस दौर में हम काम करना चाहते हैं. मगर रेजिडेंट डॉक्टर बिना किसी मानसिक दबाव के काम करना चाहते हैं. डॉक्टर मरीजों की अधिक संख्या होने के कारण अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं. मगर जब डॉक्टर अपने कर्तव्य का निर्वहन निष्ठा के साथ कर रहे हैं तो सरकार रेजिडेंट डॉक्टरों के हितों पर ध्यान क्यों नहीं दे रही. सरकार का ये रवैया डॉक्टरों को आंदोलन करने पर मजबूर कर रहा है.

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सरकार को कई बार विनती करने के बाद अब सोमवार से डॉक्टर ऐसोसिएशन दो घंटे कार्य बहिष्का करेंगे. इससे बहले 14 से 16 मई तक डॉक्टरों ने एक घंटे तक कार्य बहिष्कार किया था. इसके बाद भी सरकार की ओर से डॉक्टरों से बातचीत करने का कोई प्रयास नहीं किया गया.

ये है डॉक्टरों की मांग

डॉक्टरों की मांग है कि सरकार तीसरे वर्ष के पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की परीक्षा तारीख आगे न बढ़ाए और तय समय पर ही उनकी परीक्षा ले. डॉक्टरों का कहना है कि अगर परीक्षा की तारीख 4 महीने के लिए बढ़ेगी तो पीजी छात्रों को मानसिक रुप से प्रताड़ित होना पड़ेगा. ऐसे में 2018 के बैच के फाइनल एग्जाम मई के अंत में ही लिए जाए.

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सरकार अगर मई के अंत में एग्जाम नहीं ले सकती तो डॉक्टरों को वन टाइम रिलैक्सेशन दे और सभी को प्रमोट करे. एक तरफ डॉक्टर अपनी जान जोखिम में डालकर घंटों पीपीई किट पहन कर अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे हैं. वहीं एसी कमरों में बैठी सरकार डॉक्टरों की परेशानी का तमाशा देखते नहीं थक रही.

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इसके अलावा डॉक्टरों ने मांग की है कि जिन रेजिडेंट डॉक्टरों की 3 वर्षों की अवधि पूर्ण हो चुकी है उन्हें उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर एग्जाम के लिए योग्य भी माना जाए. सरकार ने बीते वर्ष कोरोना इंसेंटिव राशि जो कि 5000 रुपये है उसे जारी करने की बात कही थी मगर दुर्भाग्यपूर्ण है कि ये राशि अबतक जारी नहीं की गई है. ऐसे में सरकार इस राशि को जारी करे. जो डॉक्टर कोविड ड्यूटी कर रहे हैं उन्हें हॉर्ड अवाउंस भी जारी किया जाए. रेजिडेंट चिकित्सकों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी हो.

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