मध्यप्रदेश डॉक्टरों के समर्थन में कहीं कैंडल मार्च तो कहीं हुआ रक्तदान

नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के लगभग 3000 जूनियर डॉक्टर सामूहिक इस्तीफा दे चुके है. मध्यप्रदेश सरकार और डॉक्टरों के बीच जारी घमासान के बीच देशभर के डॉक्टर मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टरों को समर्थन दे रहे है. सोशल मीडिया पर #StandWithMPDoctors लगातार टॉप ट्रेंड में बना हुआ है.

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों को मिला आईएमए का साथ

इसी कड़ी में शनिवार को देश के अलग अलग हिस्सों में डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकाला. आरएमएल अस्पताल, रिम्स रांची, अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन, तेलंगाना जेडीए, सफदरजंग अस्पताल समेत सभी डॉक्टरों का साथ जूनियर डॉक्टरों को मिल रहा है. देश के अलग अलग राज्यों में डॉक्टर जूनियर डॉक्टरों के साथ हुई नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठा रहे है.

परेशान और दुखी अस्पताल स्टाफ के साथ कैसे होगा मरीजों का इलाज

इसी कड़ी में शनिवार को आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकाला. आरएमएल डॉक्टर एसोसिएशन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि आरएमएल रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ खड़ा है. उनकी मांगों को दबाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार के कदम निंदनीय है.

अब भी डटे हैं डॉक्टर

प्रशासन की ओर से रिजाइन करने वाले डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने को कहा गया है. इसी के साथ सभी डॉक्टरों को बॉन्ड की राशि जमा करने के आदेश भी दिए गए है. इन आदेशों के बाद सभी डॉक्टर सड़क पर आ गए है. सभी डॉक्टर सड़क पर कटोरा लेकर बैठ गए है. डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास न ही सिर ढकने के लिए छत है और सरकार का बॉन्ड भरने की राशि नहीं है. इसलिए वो लोगों से बॉन्ड भरने के लिए पैसे मांग रहे है.

प्रशासन ने दिया था आदेश

इससे पहले सरकार से निर्देश मिलने के बाद डॉक्टरों को बॉन्ड भरने और हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया गया था. बॉन्ड की राशि 30 लाख रुपये है. अचानक ये राशि जमा नहीं हो सकती. जूडा भोपाल के अध्यक्ष डॉ. हरिश पाठक ने बताया कि हम डॉक्टर भी कड़ी मेहनत करके, पढ़ाई करने के बाद इस पद पर पहुंचे है. पढ़ाई करने के लिए लाखों की फीस भरी है. अब बॉन्ड भरने के लिए भी हम पैसे जमा करें. इतनी राशि हमारे पास नहीं है. हम गरीब माता पिता के बच्चे है. अब हमारे माता पिता को भी धमकाया जा रहा है.

रक्तदान कर रहे डॉक्टर

वहीं सरकार की इस दमनकारी नीति के खिलाफ डॉक्टर रक्तदान कर रहे हैं. डॉक्टर रक्तदान कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जता रहे है. डॉ. हरिश ने बताया कि हम बीते चार दिन से सरकार से जो मांग कर रहे है उसमें कोई लिखितआदेश नहीं मिला है. आद हम रक्तदान के जरिए अफनी मांग सरकार के सामने रख रहे है. कोई भी डॉक्टर चाहे किसी भी राज्य में हो वो समाज का बुरा नहीं सोच सकता है. वहीं कोरोना काल में मरीजों को रक्त की जरूरत देखी गई है. अपने आंदोलन के साथ ही हम सभी सदस्य रक्तदान कर रहे है. हमारी सरकार से गुजारिश है कि डॉक्टरों की मांग को समझे.

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