NEET PG · 2021: डॉक्टरों के साथ हो रहे अन्याय पर लगे लगाम

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण काल में अस्पतालों में जो मरीजों की संख्या बढ़ रही है वो सभी के सामने है. इसी बीच सरकार ने आदेश जारी किया की पीजी फाइनल ईयर के छात्रों के एग्जाम को 4 महीनों के लिए पोस्टपोन किया जाए. इस मामले पर देशभर के पीजी मेडिकल कर रहे छात्रों में रोष है. इस आदेश को लेकर कई एसोसिएशन भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी है.

इस मामले के संबंध में हमने बात की सफदरजंग रेजिडेंट एसोसिएशन के डॉ. निलेश तनेजा से. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में डॉक्टर बहुत मेहनत से मरीजों की देखरेख कर रहे हैं. मगर सरकार डॉक्टरों की परेशानी को समझने में विफल साबित हो रही है. यही कारण है कि लगातार डॉक्टरों के मनोबल को तोड़ने वाले फैसले किए जा रहे हैं.

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ऐसा ही एक फैसला हाल ही में किया गया जिसमें नीट पीजी एग्जाम को 31 अगस्त 2021 तक के लिए पोस्टपोन किया गया. यानी कुल मिला कर पीजी एग्जाम होने में 6 महीने का अतिरिक्त समय लगेगा. ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टरों का ऐकेडेमिक ईयर का बहुत नुकसान हो रहा है. साथ ही जो जूनियर रेजिडेंट तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं उन्हें सीनियर रेजिडेंट की पोस्ट भी नहीं मिल पा रही है.

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डॉक्टरों का इस तरह से एग्जाम रोकना किसी भी सूरत में मान्य नहीं हैं. जहां पूरी दिल्ली समेत अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन लगा हुआ है, वहीं डॉक्टर अपने घरों से निकलकर कोविड ड्यूटी कर रहे हैं. अपनी और अपने परिवार की जान को जोखिम में डाल रहे हैं. इसके बदले में सरकार उत्साहवर्धन करने की जगह डॉक्टरों का एग्जाम रोककर उन्हें मानसिक तौर पर परेशान करने का काम कर रही है.

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ऐसे समय में हमारी सरकार से मांग है कि जितने समय के लिए एग्जाम को आगे बढ़ाया गया है उस समय को सीनियर रेजिडेंट के एक्सपीरियंस के तौर पर ही देखा जाए. सभी जूनियर डॉक्टरो के करियर में इससे लाभ होगा. साथ ही उनके ऐकेडेमिक करियर में भी परेशानी नहीं आएगी.

फोर्डा भी लिख चुका है पत्र

बता दें इस मामले पर फेडरेशन ऑफ डॉक्टर्स एसोसिएशन इंडिया (FORDA) की तरफ से भी एनएमसी के अध्यक्ष को पत्र लिखा जा चुका है. इस पत्र में मांग की गई थी कि फाइनल ईयर के छात्रों को वन टाइम रिलैक्सेशन देते हुए थ्योरी और प्रैक्टीकल एग्जाम में प्रमोशन दिया जाए. दरअसल कोविड ड्यूटी के दौरान सभी फाइनल ईयर के डॉक्टर अपने प्रैक्टिकल स्कील का प्रदर्शन कर चुके हैं. ऐसे में अलग से एग्जाम लेकर उनके स्कील की जांच करना तर्कसंगत नहीं है.

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