डॉक्टरों की मांग पर ध्यान दे सरकार, देखें वीडियो

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार नीट पीजी एग्जाम को पोस्टपोन कर चुकी है. एग्जाम की नई तारीखों की घोषणा होना अभी बाकी है. वहीं इस फैसले को लेकर मेडिकल फ्रेटर्निटी में बहुत रोष व्याप्त है. लगातार डॉक्टर एसोसिएशन सरकार के इस फैसले के खिलाफ मांग कर रही हैं.

NEET PG · 2021: डॉक्टरों के साथ हो रहे अन्याय पर लगे लगाम

दरअसल देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्सेस में एडमिशन के लिए पीजी की प्रवेश परीक्षा गत 18 अप्रैल को होनी थी. इस एग्जाम में देशभर से 1.70 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. वहीं सरकार ने युवा मेडिकल छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का हवाला देते हुए इस परीक्षा को टालने का निर्णय सुनाया था. इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट भी किया था.

पीजी थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स इस समय बहुत बड़ी मानसिक परेशानी वाले दौर से गुजर रहे हैं. सरकार ने एकतरफा फैसला देते हुए एग्जाम स्थगित कर दिए. इसका असर अब हर रोज डॉक्टरों पर हो रहा है. –
डॉ. राकेश बागड़ी, अध्यक्ष, फाइमा


Indian Medical Service बनाए जाने की मांग हुई तेज

आज के समय में डॉक्टरों को ये नहीं पता कि उनका एग्जाम कब होगा. कितने दिनों तक उनकी पढ़ाई जारी रहेगी? डॉक्टरों को ये अंदाजा भी नहीं है कि उन्हें डिग्री कब मिलेगी? उन्हें सीनियर रेजिडेंटशिप कबतक मिल सकेगी? ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब हर पीजी एग्जाम देने वाले डॉक्टर के पास नहीं है. सभी असमंजस में हैं.

अपनों को खोकर भी की ड्यूटी

इस कोरोना काल में जहां मरीजों की जान गई. इन मरीजों में कई रेजिडेंट डॉक्टर के अपने भी शामिल थे. इस महामारी के काल में कई डॉक्टर खुद और उनके घर परिवार के लोग भी कोरोना से संक्रमित हुए. अपने परिवार को पीड़ित देखते हुए भी डॉक्टर अपनी ड्यूटी छोड़कर नहीं गए बल्कि जनता की सेवा में जुटे रहे.

एनएमसी का ये है प्रावधान

डॉ. राकेश बागड़ी के मुताबिक एनएमसी में प्रावधान है कि एग्जाम पास करने पर पीजी कोर्स की डिग्री तीन साल में मिलती है. कोरोना काल में पीजी कर रहे डॉक्टर एग्जाम देने को भी तैयार हैं. मगर सरकार डॉक्टरों के हितों को दरकिनार करते हुए एग्जाम स्थगित करने का फैसला सुना दिया. अबतक सरकार ने डॉक्टर ऐसोसिएशनों की मांगों पर कोई गौर भी नहीं फरमाया है.

जूनियर डॉक्टरों को किया जाए प्रमोट, नीट पीजी स्थगित होने के बाद एसोसिएशन ने उठाई मांग

गौरतलब हे कि पीजी फाइनल ईयर के डॉक्टर इस समय मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. ऐसे में डॉक्टरों ने सरकार से गुजारिश की है कि वो कोरोना वॉरियर की परेशानियों की तरफ भी ध्यान दे. कोरोना वॉरियर इस समय बहुत मेंटल स्ट्रेस में काम करने को मजबूर हैं. ऐसे में एग्जाम न लेने का निर्णय अधिक परेशान करने वाला है.

FAIMA कर रहा ये डिमांड

सीनियर रेजिडेंट बनाया जाए

देश भर के डॉक्टर एसोसिएशन मांग कर रहे हैं कि सरकार उनके एग्जाम कराए. अगर ये संभव नहीं है तो उन्हें सीनियर रेजिडेंट में प्रमोट किया जाए. अगर सरकार ऐसा करती है तो डॉक्टर मानसिक तनाव से मुक्त हो सकेंगे. इसके साथ ही अच्छी तरह से मरीजों का इलाज भी कर सकेंगे. दरअसल इस समय डॉक्टरों को उनका भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है. डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा कि पढ़ाई करनी है या कोविड में ड्यूटी करनी है.

कोरोना का माहौल आमतौर पर भी डॉक्टर के लिए बहुत गंभीर है. हर रोज डॉक्टर अनगिनत मरीजों का इलाज कर रहे हैं. अपने आस पास कई मरीजों की जान जाते हुए देख रहे हैं. इस बीच एग्जाम स्थगित करने का निर्णय बहुत परेशान करने वाला है. डॉक्टर हर रोज कोविड वॉर्ड में सिर्फ मरीजों के साथ नहीं है बल्कि वो मानसिक पीड़ा से भी जूझ रहे हैं.

बता दें कि पीजी करने वाले डॉक्टरों की संख्या एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों की संख्या में काफी कम होती है. ऐसे में सरकार को चाहिए की जल्द से जल्द पीजी नीट एग्जाम कराए. डॉक्टरों की मांग पर एक्शन ले. ताकि डॉक्टर मानसिक परेशानी से मुक्त होकर ड्यूटी कर सकें.

एसोसिएशन की मांग

इस संबंध में कई एसोसिएशनों ने सरकार, स्वास्थ्य विभाग, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि नीट पीजी का आयोजन किया जाए. ताकि डॉक्टर एग्जाम दे सकें. इस मामले पर देश भर के एसोसिएशनों ने संज्ञान लिया है. हालांकि सरकार की ओर से अबतक कोई जवाब नहीं मिला है.

सोशल मीडिया पर चलाया कैंपेन

अपनी मांगों को लेकर एसोसिएशन सोशल मीडिया पर कैंपेन भी चला चुके हैं. इन कैंपेन को काफी समर्थन भी मिला. मगर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया आने का इंतजार किया जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि इस मांग को बार बार उठाते रहेंगे.

हर साल 15-20 हजार डॉक्टर बनते हैं एसआर

एक अनुमान के मुताबिक हर साल लगभग 15 से 20 हजार डॉक्टर जूनियर रेजिडेंट से सीनियर रेजिडेंट बनते हैं. इन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का वेतन रेजिडेंट डॉक्टरों की अपेक्षा लगभग 15 हजार रुपये अधिक वेतन मिलता है. सरकार रेजिडेंट डॉक्टरों को प्रमोट न करने का जो कार्य कर रही है उससे डॉक्टरों और उनके परिवारों को बहुत दुख है. जिस चुनौतीपूर्ण माहौल में डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं उसको देखते हुए सरकार को इन्हें प्रमोट करना चाहिए.

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