डॉक्टरों की नहीं सुन रही इस राज्य की सरकार, काली पट्टी बांध कर काम करने को मजबूर

नई दिल्ली. कोरोना योद्धा डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ पर कभी सेना ने फूलों की बारिश की तो कभी देश की जनता ने थाली पीटकर उनका उत्साहवर्धन किया. मगर अब वही स्वास्थ्य कर्मचारी अपने हालात से परेशान हो चुके हैं. देशभर में डॉक्टर अपने हालातों में सुधार लाने के लिए कभी प्रधानमंत्री तो कभी राज्य के मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं.

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इसी कड़ी में बीकानेर के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा को भी एक पत्र लिखा. इस पत्र के संबंध में हमने बात की एसपी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. महिपाल नेहरा से. उन्होंने बताया कि हमने कई मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा है. हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी मांगों पर गौर कर उन्हें सुनेगी.

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डॉ. महिपाल नेहरा ने बताया कि कोविड ड्यूटी में लगे डॉक्टरों को हार्ड ड्यूटी अलाउंस और स्टाइपंड में बढ़ोतरी किए जाने का नियम कई राज्यों में लागू हो चुका है. मगर राजस्थान में अब भी ऐसा नहीं हुआ है. राजस्थान सरकार ने 5000 रुपयों की कोविड इंसेंटिव की सुविधा भी शुरु की है मगर इसे डॉक्टरों को मुहैया नहीं कराया जा रहा है. वहीं राज्य व खासतौर से बिकानेर के कई रेजिडेंट डॉक्टर लगातार कोविड ड्यूटी कर परेशान हो गए हैं.

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डॉक्टर लगातार कई कई घंटों तक ड्यूटी करने को मजबूर है. मगर कोविड ड्यूटी करने के बाद डॉक्टरों को रेस्ट तक नहीं दिया जा रहा है. ऐसे हालात में डॉक्टरों को बहुत परेशानी हो रही है. इसके अलावा हमने मांग की है कि इस बार एग्जाम को जो पोस्टपोन करने की बात हो रही है. ऐसा न करते हुए सरकार मई के अंत में यानी नियमित समय पर ही पीजी फाइनल ईयर के एग्जाम आयोजित करे. अगर एग्जाम नहीं लिए जाएंगे तो सभी छात्रों को पास किया जाए ताकि उनका आर्थिक और मानसिक नुकसान होने से बचे.

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गौरतलब है कि डॉक्टरों ने कुल आठ मांगो को अपने पत्र में शामिल किया है. अब डॉक्टर काली पट्टी बांध कर अस्पताल में काम करने को मजबूर है क्योंकि उनकी मांगों के प्रति सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है. डॉक्टर महिपाल का कहना है कि अगर सरकार हमारी मांगों पर गौर नहीं कर रही है इसलिए मंगलवार 11 मई से डॉक्टर काली पट्टी बांध कर काम करेंगे.

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डॉक्टर अपना काम नहीं रोकेंगे ताकि किसी मरीज को परेशानी न हो. मगर आने वाले दिनों में एक घंटे तक कार्य नहीं करेंगे. वहीं अगर सरकार हमारी मांगों पर जल्द से जल्द अमल नहीं करती है तो डॉक्टर कठोर निर्णय लेने के लिए विवश हो सकते हैं.

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