शर्मनाक!!! कोविड संक्रमित डॉक्टर के लिए डॉक्टरों को ही जुटानी पड़ रही आर्थिक मदद

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की कमर तोड़ दी है. अस्पतालों में ऑक्सीजन से लेकर बेडों तक के लिए मारामारी चल रही है. इस परेशानी से सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि डॉक्टर भी पीड़ित हैं. एक तरफ जहां डॉक्टर अपनी जान की चिंता किए बिना ही मरीजों का इलाज करने में जुटे हुए हैं. वहीं, कोरोना संक्रमण से कई डॉक्टर व हेल्थ केयर वर्कर्स भी संक्रमण का शिकार हो चुके हैं.

शर्मनाक !!! सरकार को जगाने के लिए डॉक्टरों ने की ये मांग

मगर शर्मनाक बात ये है कि डॉक्टर जो अपनी और अपने परिवार की जान दांव पर लगा कर मरीजों की जान बचा रहे हैं, सरकार उन्हीं के लिए कोई कदम नहीं उठा रही. आलम ये है कि दिल्ली से लेकर झारखण्ड तक डॉक्टरों के लिए खुद डॉक्टरों को ही आवाज उठानी पड़ रही है. हर जगह सरकारें सोई हुई हैं.

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ऐसा ही हाल कुछ राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिल रहा है. यहां डॉक्टर अरुण गुप्ता जो बीते कई दिनों से कोरोना संक्रमित हैं, उनके इलाज का बीड़ा भी खुद डॉक्टरों को मिलकर उठाना पड़ रहा है. इस संबंध में हमने बात की फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के अध्यक्ष डॉ. राकेश बागड़ी से. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने डॉक्टरों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की हुई है.

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सरकार किसी डॉक्टर की जान जाने के बाद अगर एक करोड़ रुपये उनके परिवार को देती है तो इससे परिवार का दुख कम नहीं होता. इससे बेहतर होता कि सरकार जीते जी ही डॉक्टर को सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए ताकि उनकी जान बच सके. ठीक होने पर वो दोबारा अस्पताल में जाकर मरीजों की देखरेख कर सकते हैं.

एम्स के डॉक्टर विजय गुर्जर का कहना है कि सरकार आंख मूंदे सब देख रही है. डॉक्टरों को ही डोनेशन इकट्ठा करना पड़ रहा है. हमें अपने साथी के लिए मदद मांगनी पड़ रही है. डॉक्टरों के लिए कुछ न करना, ये सरकार की इज्जत है हमारे लिए.  एक डॉक्टर को अपनी चिंता किए बिना मरीजों का इलाज करने में जुटा हुआ है, उनके साथ सरकार का ऐसा व्यवहार निंदनीय है.

सरकार को नहीं डॉक्टरों की चिंता

उन्होंने डॉ. अरुण गुप्ता का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इधर से उधर अस्पतालों में ट्रांसफर किया जाता रहा. इसीएमओ के लिए भी डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर गुहार लगाई तब उन्हें ईसीएमओ की सुविधा मिल सकी. जब सरकार आज के समय में भी डॉक्टरों की चिंता नहीं कर रही तो भविष्य में कभी डॉक्टरों के लिए सरकार खड़ी नहीं होगी. सरकार का एक करोड़ रुपये मुआवजा नहीं बल्कि डॉक्टरों को ठीक करवाने में सच्ची कोशिश करना अधिक महत्वपूर्ण है.

पत्र लिखकर आर्थिक सहायता मांगने को मजबूर

इस संबंध में फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FORDA) ने भी दिल्ली सरकार को पत्र लिखा है. पत्र में सत्यवादी हरिशचंद्र अस्पताल के डॉक्टर अमित गुप्ता को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद दिए जाने की मांग की गई है. फोर्डा अध्यक्ष डॉ. पार्थ बोहरा का कहना है कि सरकार की ओर से अबतक डॉ. अमित के परिवार को आर्थिक सहायता की पेशकश तक नहीं की गई है. ये बहुत गंभीर मामला है क्योंकि एक डॉक्टर जो ड्यूटी करते हुए कोरोना संक्रमित हुआ और आज सरकार ही उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रही है.

सरकार सिर्फ डॉक्टरों की जान जाने के बाद परिवार को मुआवजा देने की बात कर रही है. मगर जब सरकार के हाथ में है कि वो आर्थिक मदद कर डॉक्टर की जान बचाए तो उनकी मदद नहीं की जा रही. डॉक्टरों को आर्थिक मदद और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों की ही जरुरत है. हमने सरकार से मांग की है कि डॉक्टरों को कैशलैस ट्रीटमेंट की सुविधा अस्पतालों में मिले. सरकार कोरोना संक्रमित डॉक्टरों के इलाज में आ रहे खर्चे के लिए भी मदद करे. इसका खर्चा भी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में शामिल किया जाए.

झारखण्ड में डॉक्टर जुटा रहे फंड

झारखण्ड में कोविड संक्रमण से लड़ते हुए 10 मई की सुबह डॉ. सिराज की जान चली गई थी. इसके बाद खुद डॉक्टरों ने ही उनके परिवार के लिए मुआवजा इकट्ठा करने की पहल शुरु की. इस संबंध में JDA अध्यक्ष डॉ. विकास कुमार ने कहा कि, डॉ. सिराज 18 दिनों से एडमिट थे और आज उनकी मृत्यु हो गई. उनके साथ असंवेदनशीलता बरती गई है. नैतिक तौर पर भी अभी तक ने भी उनके परिवार की सुध नहीं ली है.

हमने डॉ. सिराज की पत्नी के लिए फंड दिए जाने की पहल शुरु की है. इनके अलावा डॉ. अमित कुमार सिन्हा जो मेडिका में ईसीएमओ पर हैं इनके लिए खुद फंड इकट्ठा कर रहे हैं. सोशल मीडिया और ट्वीटर पर इसके लिए अभियान चलाया गया है. जहां परिवार अपने घर का सदस्य खो रहे हैं सरकार उन डॉक्टरों के प्रति इतनी संवेदनहीन बनी हुई है.

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