अस्पताल में नहीं मिला इलाज, डॉक्टर ने कोरोना से गंवाई जान

कोरोना संक्रमण से लड़ाई में इस समय डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ जी जान लगाकर जनता की सेवा में जुटे हुए हैं. कोरोना काल में इन्हें कोविड वॉरियर कहा जा रहा है. मगर बहुत शर्मनाक स्थिति है कि इन्हीं कोविड वॉरियर्स को कोरोना संक्रमित होने पर इलाज के लिए मोहताज होना पड़ रहा है. ऐसा ही मामला देखने को मिला है दिल्ली सरकार के महर्षि वाल्मिकी अस्पताल के डॉक्टर संजीव कुमार के साथ.

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Maharishi Valmiki Hospital (file photo)

दरअसल, महर्षि वाल्मिकी अस्पताल में पेड्रियाट्रिक विभाग के हेड डॉ. संजीव कुमार की आज कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई. जानकारी के मुताबिक डॉ. संजीव बीते 10-12 दिनों से कोरोना संक्रमित थे. कुछ दिन पहले ही उन्हें दिल्ली स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहां भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. जिसके बाद परिजन उन्हें आगरा ले गए. आगरा में इलाज के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई.

खुद मदद करने वाले को नहीं मिली मदद

जानकारी के मुताबिक डॉ. संजीव को गरीबों व असहायों की मदद करना पसंद था. समय मिलने पर वो अलमोड़ा से 22 किलोमीटर आगे बने किसी आश्रम में जाकर वहां लोगों की मदद करते थे. मरीजों की सेवा किया करते थे. मगर जब उन्हें मदद की जरूरत पड़ी तो दिल्ली सरकार ने उन पर ध्यान ही नहीं दिया. इसी कारण मरीज बना हुआ एक डॉक्टर जान गंवा बैठा.

एसोसिएशन ने दी श्रद्धांजलि

स्पेशलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने डॉ. संजीव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है.

नहीं मिला सही इलाज

इस संबंध में हमने बात की महर्षि वाल्मिकी अस्पताल के पूर्व डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. बी. के. डे से. उन्होंने बताया कि कोरोना काल में डॉक्टर बहुत गंभीर हालातों में मरीजों की सेवा करने में जुटे हुए हैं. वहीं इस दौरान अगर कोई डॉक्टर ही इलाज के अभाव में जान गंवा देता है तो ये दिल्ली सरकार के लिए शर्म की बात है. सरकार अपने वॉरियर्स को ही सही सुविधाएं मुहैया नहीं करवा पा रही है.

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डॉ. बी. के. ने कहा कि दिल्ली सरकार के डॉक्टर्स के लिए कहीं भी बेड रिजर्व नहीं है और न ही इस बारे में किसी को किसी प्रकार की कोई सूचना है कि कोरोना से संक्रमित होने की स्थिति में कोई डॉक्टर इलाज के लिए कहां जाए. साथ ही, उन्होंने कहा कि न तो कार्यक्षेत्र में चिकित्सा के दौरान और न ही यदि किसी डॉक्टर की मृत्यु के उपरांत मुआवजा, परिवार को आर्थिक सहायता कैसे मिलेगी, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। इसलिए डॉक्टर्स काफी हतोत्साहित स्थिति में है।

डॉक्टर हो रहे शिकार

इन दिनों कई डॉक्टर लगातार ड्यूटी करते हुए परेशान हो गए हैं. कई घंटों तक लगातार डॉक्टर पीपीई कीट पहन कर कोविड ड्यूटी करने को मजबूर हैं. डॉक्टर भी परेशान हो चुके हैं. आज के समय में ऐसे 65 प्रतिशत डॉक्टर हैं जो मानसिक पेरशानी से जूझ रहे हैं. इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टर मरीजों को ठीक करने की कोशिश करने में जुटे हुए हैं. मगर स्थिति लगातार खराब हो रही है जिससे डॉक्टर भी परेशान हैं.

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